29 जून 2022
जरूरतमंदों की पूर्ति के लिए नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ब्लड ग्रुप अनुसार रक्त उपलब्ध है तथा ग्रुप अनुसार भविष्य में भी कोई दिक्कत न आए, इसके लिए युवाओं एवं सामाजिक संगठनों को प्रेरित करके उनके ग्रुप बनाए गए हैं। जो अस्पताल पहुंचकर न केवल समय-समय पर रक्तदान करेंगे, बल्कि जिले में विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाकर ब्लड बैंक की पूर्ति करने में भी योगदान देंगे। यह कदम विश्व रक्तदान पखवाड़ा के दृष्टिगत उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करता रहता है। कई बार ब्लड के सभी ग्रुप अनुसार रक्त अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने पर जरूरतमंदों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी परेशानी को दूर करते हुए ब्लड बैंक की इंचार्ज डा. संगीता यादव ने विश्व रक्तदान पखवाड़ा के तहत विशेष कदम उठाए गए हैं और रक्तदान के युवाओं एवं सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहित किया गया है, ताकि अस्पताल में हर वक्त सभी ब्लड ग्रुप की यूनिट मौजूद रहे। इस पखवाड़े के तहत ब्लड बैंक की ओर से कनीना के सरकारी अस्पताल एवं नारनौल के सीबीएम अस्पताल के सहयोग से रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जहां से ब्लड बैंक को करीब 120 यूनिट रक्त प्राप्त हुआ। इस समय अस्पताल के ब्लड बैंक में सभी ग्रुप का रक्त उपलब्ध है|
ब्लड के ग्रुप अनुसार मददगार ब्लड बैंक में ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव, ए-नेगेटिव की भांति ही बी-पॉजिटिव व नेगेटिव तथा ओ-पॉजिटिव एवं नेगेटिव की यूनिट भी मौजूद हैं। कई बार नेगेटिव यूनिट की दिक्कत हो जाती है, तब जरूरतमंदों की पूर्ति के लिए संपर्क करने पर स्वेच्छा से रक्तदाता आगे बढ़कर आते हैं और जरूरत वाले रक्त की आपूर्ति करने में योगदान देते हैं।
स्टॉफ को दिलाई शपथ नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्टॉफ को भी सहयोगी बनाया गया है, जो जरूरत पड़ने पर युवाओं को रक्तदान के लिए न केवल प्रेरित करेंगे, बल्कि खुद भी रक्तदान करेंगे। इसी उद्देश्य से रक्तदान पखवाड़े के समापन पर ब्लड बैंक की इंचार्ज डा. संगीता यादव ने उन्हें शपथ दिलाई। महिलाओं ने भी रक्तदान किया, जबकि सिविल सर्जन डा. अशोक कुमार के बेटे आयुष को 18 साल का होने पर अपने जन्मदिन पर रक्तदान करने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
रक्तदान से नहीं पड़ता विपरित असर ब्लड बैंक की इंचार्ज डा. संगीता यादव ने बताया कि रक्तदान से अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से जख्मी मरीजों की जिंदगी बचाई जाती है। कैंसर व थैलीसीमिया के रोगियों का समय पर खून मिल जाए तो उनके लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसलिए युवा इस महायज्ञ में आहुति डालते रहें और यह क्रम हर छह माह में निभाते रहें।

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