रोजनामचा में 'पत्रकारिता का धौंस' दिखाने का उल्लेख करने पर उठाए सवाल, शिकायतकर्ता बोला- आरोपी को बचाने के लिए मुझे ही बना दिया गया दोषी
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सुराज हॉस्पिटल मामले में नया मोड़: जांच अधिकारी पर पक्षपात का आरोप, शिकायतकर्ता ने पीएमओ सहित जिले एस पी से मांगी निष्पक्ष जांच

दुर्ग।

भिलाई के नेहरू नगर स्थित सुराज हॉस्पिटल में आयुष्मान वय वंदना कार्ड के कथित दुरुपयोग और अतिरिक्त नकद वसूली के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले के शिकायतकर्ता एवं त्वरित खबरें समाचार पत्र के प्रधान संपादक प्रहलाद दुबे ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)  सहित जिले के एस पी को विस्तृत शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि थाना सुपेला के जांच अधिकारी एएसआई राजेश तिवारी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय अस्पताल प्रबंधन को संरक्षण दिया और शिकायतकर्ता को ही संदेह के घेरे में खड़ा करने का प्रयास किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने अपने 80 वर्षीय पिता के इलाज के दौरान सुराज हॉस्पिटल पर आयुष्मान वय वंदना कार्ड से ₹62,300 की राशि लेने के बावजूद अतिरिक्त ₹57,000 नकद बिना बिल के वसूलने का आरोप लगाया था। इस संबंध में उन्होंने ऑडियो-वीडियो साक्ष्य होने का भी दावा किया है।

रोजनामचा की जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता ने पुलिस रोजनामचा की प्रति भी सार्वजनिक की है। उनका आरोप है कि जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में शिकायत की जांच के बजाय यह उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता "पत्रकारिता का धौंस" दिखाता है तथा उसके विरुद्ध पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड होने जैसी बातें दर्ज कर दीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन तथ्यों का मूल शिकायत से कोई संबंध नहीं है और इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कई बार निजी मोबाइल नंबर से थाने बुलाया गया, जबकि कोई विधिवत लिखित नोटिस जारी नहीं किया गया। उनके अनुसार जब वे थाने पहुंचे तो संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं थे।

स्वास्थ्य विभाग की जांच का भी किया उल्लेख

पीएमओ को भेजी शिकायत में प्रहलाद दुबे ने दावा किया है कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग रायपुर द्वारा पूर्व में जांच की गई थी, जिसमें अस्पताल की अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। उन्होंने मांग की है कि उस जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेकर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

पीएमओ एवं दुर्ग एस पी से की ये प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग की है कि—

  • पूरे प्रकरण की पुनः निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए।
  • स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
  • "पत्रकारिता का धौंस" दिखाने संबंधी आरोप का लिखित प्रमाण उपलब्ध कराया जाए।
  • यदि आरोप निराधार पाए जाएं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।
  • जांच में किसी भी अधिकारी द्वारा पक्षपात या आरोपी पक्ष को संरक्षण दिए जाने की पुष्टि होने पर उचित कार्रवाई की जाए।
  • भविष्य में सभी सूचनाएं केवल लिखित एवं शासकीय माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं।

पुलिस रोजनामचा में क्या दर्ज है

29 मार्च 2026 की रोजनामचा प्रविष्टि में उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता को बयान के लिए थाने बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। साथ ही रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि शिकायतकर्ता पूर्व में कई स्थानों पर शिकायतें कर चुका है तथा "पत्रकारिता का धौंस" दिखाता है। इसी प्रविष्टि को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि जांच अधिकारी ने मूल शिकायत की जांच करने के बजाय उनके व्यक्तित्व पर टिप्पणी की है।


"SI राजेश तिवारी की जांच पर गंभीर सवाल! शिकायतकर्ता पत्रकार को ही बना दिया आरोपी?"

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