जांजगीर में अनिरुद्धाचार्य महाराज के बड़े बयान: आरक्षण से लेकर धर्म परिवर्तन और फिल्मों में साधु-संतों के चित्रण पर कही ये बात...
त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

जांजगीर-चांपा। जिले के बम्हनीडीह में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ हो गया है। कथा के आयोजन के बीच अनिरुद्धाचार्य महाराज ने प्रेसवार्ता कर सत्संग, सनातन धर्म, सामाजिक व्यवस्था, आरक्षण, धर्म परिवर्तन और फिल्मों में साधु-संतों के चित्रण सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि कलियुग में भागवत कथा और राम कथा का श्रवण एवं वाचन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। धार्मिक आयोजनों और सत्संग से व्यक्ति के मन की नकारात्मकता और विकृतियां दूर होती हैं तथा उसे अपने जीवन में सुधार करने की प्रेरणा मिलती है।

आरक्षण को लेकर कही ये बात

आरक्षण के मुद्दे पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक पहुंचना चाहिए, जो सामाजिक रूप से दबे हुए और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वहीं, यूजीसी से जुड़े कानून को लेकर उन्होंने आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की कि इस तरह के प्रावधानों से समाज में जातिगत तनाव और हिंसा बढ़ सकती है।

बोले- जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश

छत्तीसगढ़ की जनता की तारीफ करते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा, “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।” उन्होंने प्रदेशवासियों को सहज, सरल और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों की धार्मिक आस्था और सरल स्वभाव उन्हें अलग पहचान देता है।

अनिरुद्धाचार्य ने सनातन धर्म को देश, समाज और परिवार को एक सूत्र में बांधने वाला बताया। उन्होंने कहा कि जाति-पाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने मनुस्मृति की गलत व्याख्या किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके आधार पर सनातन धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया जाता रहा है।

सती प्रथा को लेकर भी रखी राय

सती प्रथा के मुद्दे पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ने कभी सती प्रथा का समर्थन नहीं किया। उन्होंने रामायण और महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कहा कि पति की मृत्यु के बाद पत्नी का सती होना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर महिलाओं को जबरन सती कराया गया, जिसके कारण पूरे सनातन धर्म को बदनाम किया गया। उनके मुताबिक बाद में राजा राममोहन राय के प्रयासों से इस कुप्रथा को समाप्त कराया गया।

धर्म परिवर्तन पर जागरूकता की अपील

धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर उन्होंने सरकार के साथ-साथ आम लोगों से भी जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने लोगों से किसी भी तरह के बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन नहीं करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने और गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग भी की।

फिल्मों में साधु-संतों के चित्रण पर जताई नाराजगी

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने फिल्मों और वेब सीरीज में साधु-संतों के चित्रण को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मों में कई बार सवर्ण समाज को नकारात्मक या विलेन के रूप में दिखाया जाता है। उन्होंने ‘आश्रम’ जैसी फिल्मों और वेब सीरीज के जरिए साधु-संतों के अपमान का आरोप लगाया।

वहीं, उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ से जुड़ी फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों के जीवन और उनके योगदान पर आधारित फिल्में बनाई जानी चाहिए। फिलहाल बम्हनीडीह में नौ दिवसीय कथा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।

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