“जहाज पर हंतावायरस का प्रकोप: 3 की मौत, दो भारतीय भी शामिल; विशेषज्ञ बोले—कोरोना जितना तेज नहीं फैलता”
tvarit khabren (arun reporting)

एक अंतरराष्ट्रीय जहाज में फैले हंतावायरस संक्रमण ने वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि जहाज पर सवार दो भारतीय नागरिकों के भी संक्रमित होने की सूचना सामने आई है। हालांकि, चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह वायरस कोरोना वायरस की तरह तेजी से फैलने वाला नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सूत्रों के अनुसार, यह जहाज एक लंबी समुद्री यात्रा पर था, जहां अचानक कुछ यात्रियों में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। शुरुआती जांच में इन मामलों को सामान्य संक्रमण समझा गया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर जांच के बाद हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद जहाज पर मौजूद यात्रियों और क्रू मेंबर्स के बीच हड़कंप मच गया।

हंतावायरस एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के माध्यम से फैलता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से मनुष्यों में प्रवेश कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण सामान्यतः व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, जो इसे कोरोना वायरस से अलग बनाता है। इसी कारण डॉक्टरों ने कहा है कि यह वायरस उतनी तेजी से नहीं फैलता जितनी तेजी से कोविड-19 फैला था।

जहाज पर स्थिति बिगड़ने के बाद तत्काल मेडिकल इमरजेंसी घोषित की गई और संक्रमित लोगों को आइसोलेट किया गया। जहाज को एक निर्धारित बंदरगाह पर रोककर स्वास्थ्य जांच शुरू की गई है। सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है और संदिग्ध मामलों को अलग रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत संबंधित देशों की एजेंसियों को भी सूचित किया गया है।

डॉक्टरों ने बताया कि हंतावायरस के संक्रमण से फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसे हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। यह स्थिति कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर यदि समय पर इलाज न मिले। हालांकि, शुरुआती पहचान और उचित चिकित्सा से मरीजों के ठीक होने की संभावना भी रहती है।

जहाज पर मौजूद भारतीय नागरिकों को भी चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उन्हें पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस वायरस को लेकर अनावश्यक भय फैलाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। बंद और अस्वच्छ स्थानों में चूहों की मौजूदगी इस संक्रमण के फैलने का प्रमुख कारण बन सकती है, इसलिए साफ-सफाई और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों की भी समीक्षा शुरू हो गई है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोका जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भले ही सीमित स्तर पर है, लेकिन यह चेतावनी देता है कि किसी भी संक्रामक रोग को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है।

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