डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी देवी के नाम और उनकी प्राचीन परंपराओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। देवी को बमलाई दाई, बम्लेश्वरी या बगलामुखी किस नाम से संबोधित किया जाना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसी बीच गोंड समाज ने देवी से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति को लेकर अपनी आपत्ति जताई है।
गोंड समाज का कहना है कि डोंगरगढ़ की पहाड़ी और वहां की देवी से जुड़ी उनकी पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समाज की ओर से देवी के प्राचीन स्वरूप, नाम और पूजा परंपरा को लेकर अपनी बात सामने रखी गई है।
विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि समय के साथ डोंगरगढ़ की देवी को अलग-अलग नामों और धार्मिक स्वरूपों से जोड़ा गया। यही वजह है कि अब देवी के वास्तविक नाम और ऐतिहासिक पहचान को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में देवी की पहचान और परंपरा से जुड़ा यह मुद्दा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
डोंगरगढ़ की देवी की प्राचीन पहचान और परंपराओं को लेकर इतिहास क्या कहता है?

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