छत्तीसगढ़ के भिलाई से उत्तराखंड घूमने गए सभी 55 यात्री दुर्ग लौट आए हैं। शनिवार सुबह 5.15 बजे समता एक्सप्रेस से सभी लौटे हैं। दुर्ग स्टेशन पर सभी यात्रियों का पुलिस ने गुलाब का फूल देकर स्वागत किया। इतने बड़े हादसे से बचकर वापस आने के बाद उनकी आंखों में जहां अपनों से मिलने की खुशी थी तो वहीं वहां का डर भी साफ दिख रहा था। जब इन लोगों से बात की गई तो उन्होंने जैसा हादसे के बारे में बताया वह सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
हर 5 कदम पर रोप-वे टूट चुका था
उत्तराखंड से लौटी महिला यात्री ने बताया कि तेज बारिश, कड़कती बिजली के बीच भी हम निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर पांच कदम पर रोप-वे टूट चुका था। वहां चल पाना भी नामुमकिन था। मेरे साथ दो बच्चे भी थे, वहां दो छोटे बच्चों को लेकर रहना बहुत मुश्किल था।
हमारे जीवन की भयानक रात
सिंधिया नगर भिलाई के प्रशन्नजीत दास की पत्नी सुमन दास ने बताया कि उनके और वहां फंसे लोगों के पास भगवान से प्रार्थना करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। सभी यही प्रार्थना कर रहे थे कि कैसे भी करके बारिश रुक जाए। उन्हें नहीं लगा था कि वो बच पाएंगे। 48 घंटे तक लगातार बारिश हुई। वो रात हमारे जीवन की सबसे भयानक रात थी।
सुमन ने बताया कि जहां पर हमारी बस फंसी थी उसके आगे एक छोटा सा नाला बह रहा था, लेकिन कुछ घंटों में नाले ने रोड को काटकर बड़ा रूप ले लिया और आसपास की मिट्टी कटने लगी। इसके बाद बस ड्राइवर ने पीछे खड़ी एसयूवी के ड्राइवर को कहा गाड़ी हटाओ नहीं तो वह उसके ऊपर ही बस चढ़ा देगा।
इसके बाद एसयूवी किनारे हुई बस ड्राइवर ने जैसे ही बस पीछे हटाई वहां की मिट्टी धंस गई। अगर कुछ सेकेंड भी वह रुक जाता तो सभी लोग बस के साथ खाई में चले जाते।
हमारी आंखों के सामने बह गए कई घर
दुर्ग लौटे यात्रियों ने बताया कि वहां तेज बारिश हो रही थी। मिट्टी बहने से पहाड़ों पर बने घर एक-एक करके बह रहे थे। हमारी आंखों के सामने एक झोपड़ी और उसमें रह रहे कई जानवर बह गए। झोपड़ी मालिक अपनी किसी तरह जान बचाकर सुरक्षित स्थान पर खड़ा था।

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