भिलाई में फर्जी लोन रैकेट का भंडाफोड़: बैंक पासबुक लेकर साइबर फ्रॉड में करते थे इस्तेमाल
त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

भिलाई, के छावनी इलाके में साइबर फ्रॉड और क्रिकेट सट्टे से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान आकाश जायसवाल निवासी शारदा पारा कैंप-02 भिलाई और जावेद अख्तर निवासी मदर टेरेसा नगर कैंप-01 भिलाई के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से बैंक दस्तावेज, पासबुक और एक मोबाइल फोन जब्त किया है।

मामला थाना छावनी क्षेत्र स्थित बैकुण्ठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-25 परिसर का है। यहां आरोपी आसपास के लोगों को जल्दी लोन दिलाने का लालच देकर उनके बैंक खाते और दस्तावेज जमा करवा रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इन बैंक खातों का उपयोग “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा है। ऐसे खाते आमतौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के लेनदेन में इस्तेमाल किए जाते हैं। सूचना मिलते ही छावनी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।

16 मई को पुलिस को सूचना मिली कि जावेद अख्तर, आकाश जायसवाल के माध्यम से लोगों के बैंक खाते और पासबुक इकट्ठा कर रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे लोगों को कम समय में लोन दिलाने का भरोसा देते थे और बदले में उनसे बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, खाते की जानकारी और अन्य दस्तावेज ले लेते थे। बाद में इन खातों को मोटी रकम लेकर दूसरे लोगों को उपलब्ध कराया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और क्रिकेट सट्टेबाजी जैसी अवैध गतिविधियों में किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा जुटाए गए खातों के जरिए साइबर अपराध से हासिल रकम को ट्रांसफर किया जाता था, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। इस तरह के खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से महाराजा बैंक से संबंधित कई बैंक खाते, पासबुक और अन्य दस्तावेज बरामद किए। इसके अलावा वीवो कंपनी का एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस मोबाइल और बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य शहरों और राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड या दस्तावेज न दें, क्योंकि इसका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा सकता है।

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