सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एर्राबोर स्थित पीएम श्री कन्या आश्रम में पढ़ने वाली कक्षा पहली की मासूम छात्रा की बुखार से मौत हो गई है। मृत छात्रा की पहचान मड़कम देवे, पिता मड़कम जोगा, निवासी मेटागुड़ा, पंचायत पालाचलमा के रूप में हुई है। इस घटना ने आवासीय आश्रमों में बच्चों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने आश्रम प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है।
कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी मासूम
परिजनों के अनुसार, बच्ची कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी और उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इसके बावजूद आश्रम प्रबंधन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय रविवार को परिजनों के हवाले कर दिया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बच्ची को सामान्य बुखार होने की बात कहकर भेज दिया गया, जबकि उसकी हालत गंभीर थी।
अधीक्षिका मौके पर नहीं थीं
परिजनों ने बताया कि रविवार सुबह करीब 10 बजे वे बच्ची को लेने आश्रम पहुंचे थे। उस दौरान आश्रम की अधीक्षिका भी मौके पर मौजूद नहीं थीं। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्ची को उनके साथ भेज दिया गया।
उफनते नदी-नालों में फंसे परिजन, सोमवार को तोड़ा दम
बारिश के कारण मेटागुड़ा जाने का रास्ता बेहद कठिन था। नदी-नाले उफान पर होने के कारण परिजन रविवार को बच्ची को घर नहीं ले जा सके। सोमवार को किसी तरह घर पहुंचाने के कुछ ही घंटे बाद दोपहर करीब 12 बजे मासूम ने दम तोड़ दिया।
उठ रहे कई सवाल
अब सवाल उठ रहा है कि जब बच्ची कई दिनों से बीमार थी, तो उसे समय रहते अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया? क्या आश्रम में उसकी स्वास्थ्य जांच कराई गई थी? गंभीर हालत में दूरस्थ और बारिश प्रभावित इलाके में रहने वाले परिजनों को बुलाकर बच्ची को घर भेजना कितना सुरक्षित था? फिलहाल बच्ची की मौत का वास्तविक कारण मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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