रायपुर। माना एयरपोर्ट की जमीन के मुआवजे को लेकर एक किसान और प्रशासन के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। किसान ने अपनी जमीन के मुआवजे के रूप में करीब 13 हजार करोड़ रुपये की मांग की है। इससे पहले किसान की ओर से करीब 3,500 करोड़ रुपये का क्लेम किया गया था।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद शीर्ष अदालत के निर्देश पर अब मुआवजे से जुड़े दावे का अंतिम फैसला तहसीलदार द्वारा किया जाएगा। प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच जमीन के मूल्यांकन एवं मुआवजे की राशि को लेकर विवाद बना हुआ है।
किसान का दावा है कि एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित जमीन के उचित मुआवजे का निर्धारण नहीं किया गया। इसी आधार पर पहले 3,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 13 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे से जुड़े दावे पर नियमानुसार निर्णय लेने के लिए तहसीलदार को निर्देशित किया है। अब राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के अधिग्रहण, पूर्व में निर्धारित मुआवजे और किसान द्वारा किए गए दावे समेत संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसान के दावे के अनुसार मुआवजा निर्धारित होता है या प्रशासन द्वारा तय मुआवजा ही मान्य रहेगा। फिलहाल इस मामले में तहसीलदार की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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