मीनाक्षी घबराकर भागीं, सीनियर्स को बुलाया:कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन रद्द की इनसाइड स्टोरी, एक्सपर्ट बोले- रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला सही नहीं
त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन रद्द होने का मामला अब राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान जब कुछ तकनीकी आपत्तियां सामने आईं तो संबंधित अधिकारी मीनाक्षी अचानक असहज हो गईं और उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान काफी देर तक असमंजस की स्थिति बनी रही, जिसके बाद नामांकन निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रत्याशी समर्थकों ने कड़ी आपत्ति जताई तथा आरोप लगाया कि नियमों की गलत व्याख्या कर उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने की कोशिश की गई है। मामले पर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नामांकन पत्र में कोई ऐसी त्रुटि नहीं थी जो कानून के अनुसार गंभीर श्रेणी में आती हो, तो केवल तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। कई चुनाव विशेषज्ञों ने रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी लोकतंत्र में उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का अवसर देना प्राथमिकता होनी चाहिए और मामूली त्रुटियों को सुधारने का मौका भी दिया जाता है। दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि निर्णय पूरी तरह नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है और अब कांग्रेस इस फैसले को कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मामला न्यायालय तक पहुंचता है तो नामांकन निरस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच हो सकती है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होगी।

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