अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए:हेलिकॉप्टर गिराने के बदले में अटैक; जवाब में ईरान का बहरीन में अमेरिकी बेस पर हमला
त्वरित खबरे ; हर्ष कुमार गुप्ता

मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और गहरा गया है। अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया कि ईरान समर्थित बलों की कार्रवाई में एक अमेरिकी सैन्य हेलिकॉप्टर के गिराए जाने के बाद यह हमला “आत्मरक्षा” और जवाबी कार्रवाई के तौर पर किया गया। इसके बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए बहरीन समेत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। अमेरिका ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों और हितों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा

अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरान ने कहा कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय सहित क्षेत्र में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बहरीन में मिसाइल अलर्ट सायरन बजाए गए, जबकि कुवैत और जॉर्डन ने भी अपने हवाई रक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया। कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराने का दावा किया गया है।

इस बढ़ते संघर्ष ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चेतावनी दी है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता 

संघर्ष का असर आर्थिक मोर्चे पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जबकि कई देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। भारत सहित तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता भी बढ़ गई है क्योंकि तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान हालात मध्य-पूर्व को एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। हालांकि दोनों पक्ष अपनी कार्रवाई को जवाबी और सीमित बता रहे हैं, लेकिन लगातार हो रहे हमले और प्रतिहमले स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा पूरे क्षेत्र की स्थिरता तय कर सकती है। 

YOUR REACTION?

Facebook Conversations