कवर्धा न्यूज /निशा बिस्वास छत्तीसगढ़ मार्केटिंग हैड रिपोर्टिंग / बीते 3 अक्टूबर को कवर्धा में एक धार्मिक विवाद ने हिन्दु मुस्लिम दंगे को जन्म दिया। बहुत लोगों को इस विवाद का सच मालूम नहीं होगा जो आज इस लेख के माध्यम से आप सभी को बताने जा रहा हूँ।
दरअसल 3 अक्टूबर को *दुर्गेश देवांगन* नामक एक सब्जी व्यापारी कवर्धा के लोहारा चौक पर एक खंबे के ऊपर नवरात्र प्रारंभ होने से पहले की तैयारियों के दौरान भगवा रंग का झंडा लगा देता है। इस झंडे को कुछ मुस्लिम युवक उखाड़ कर फेंक देते हैं एवं उस झंडे को पैरों रौंदते एवं उस पर थूकते हुए दुर्गेश की ओर अभद्र इशारा व टिप्पणी करते हुए देखते हैं। इस कृत्य से दुर्गेश देवांगन भगवा झंडे का अपमान ना सहने की बात करते हुए उनसे जा भिड़ता है, लेकिन मुस्लिम युवकों की संख्या अधिक होने के कारण दुर्गेश उनसे लड़ नहीं पाता, व उनसे बुरी तरह से पिट जाता है पास ही में खड़े पुलिसकर्मी भी इस वारदात को देखकर सहम जाता है व दुर्गेश की मदद नहीं करता है। उसके बाद कुछ हिन्दु युवक वहाँ पर पहुँच जाते हैं, व मामले में हस्तक्षेप करते हुए दुर्गेश को सुरक्षित एक दुकान के अंदर डालकर दरवाजा बंद कर देते हैं। शाम को दुर्गेश देवांगन द्वारा उक्त घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में की जाती है परंतु उसकी कोई शिकायत दर्ज नहीं की जाती व उल्टा उसे ही वहाँ से फटकार लगाकर भगा दिया जाता है, क्योकि वहां का स्थानीय विधायक व मंत्री *मोहम्मद अकबर* भी मुसलमान ही है एवं आदतन अपना धर्म निभाते हुए वह अपने तबके को ही प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को इस संदर्भ में कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने से मना करवा देता है। तत्पश्चात लगभग 30000 तीस हजार की संख्या में हिन्दुओं की अपार भीड़,,, जिसमें RSS बजरंग दल व विश्व हिन्दु परिषद् भी शामिल थी ने पूरे कवर्धा की पुलिस प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन करने लग जाते हैं। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन बजाए प्राथमिकी दर्ज करने के उल्टा उन पर लाठी भांजने लग जाते हैं। यह सब किसके इशारे पे हो रहे थे हिन्दुओं को समझ आ चुका था तब एक बड़ा क्रांतिकारी फैसला लिया जाता है एवं हजारों की संख्या में इन सभी हिन्दु संगठनों व स्थानीय निवासियों द्वारा मुसलमानों की बस्ती पर धावा बोल दिया जाता है। इसके बाद पुलिस प्रशासन नें वहां पर आनन फानन में धारा 144 लगा दिया। आप सभी से मेरा करबध्द निवेदन है कि जो बोलते हैं धर्म के नाम पर लड़ाया जाता है उनकी बातों पर ना आए एवं अपने धर्म की रक्षा आन बान और शान से करें। यदि कोई हमारे धर्म का अपमान करता है तो सारी पार्टीगत राजनीति छोड़कर उनको सबक सिखाना ही हमारा प्रथम कर्तव्य होगा।
आजादी के बाद से ही हमारे देश में मुस्लिम प्रधानमंत्री ने राज चलाया है व लगभग सत्तर वर्षों तक मुस्लिम दल से ही प्रधानमंत्री बनते गये हैं। जिसके कारण इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या और हौसला दोनों बढ़े हुए हैं।
*इंदिरा खान* के शासनकाल में हिन्दुओं को जबरन पकड़ पकड़कर नसबंदी कराया गया एवं मुसलमानों का नहीं क्यों ?
जब भारत 1947 आजाद हुआ तब पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना लेकिन भारत को हिन्दु राष्ट्र नहीं बनाया गया क्यों ?
मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति इस देश में एक नहीं अनेकों पार्टियों द्वारा चलाई जाती रही है, जिसके कारण हिन्दु पिछड़ रहे हैं। आजादी के बाद भारत में मुसलमानों की संख्या 17% थी आज 33% हो चुकी है। इतिहास गवाह है जिन जगहों पर मुसलमानों की जनसंख्या हिन्दुओं की जनसंख्या से आधा हो जाता है वहाँ पर स्वतः ही खुनी संघर्ष प्रारंभ हो जाता है व अंततः मुसलमान उस स्थान पर कब्जा करने में कामयाब होते हैं। क्योंकि अपने हिन्दु ही गद्दार होते हैं जो पार्टी के मोह में आकर अपनो का गला कटवाने से भी पीछे नहीं हटते।
इसके कई उदाहरण इसी देश में है, जैसे केरल, कश्मीर, असम, प० बंगाल ये बड़े राज्य हैं शहरों और गावों की तो गिनती नहीं हैं जहां पर अब मुसलमान बहुसंख्यक होने चुके हैं, महाराष्ट्र का *पालघर* तो याद ही होगा, याद रखना हम ना सम्हल पाए तो कितने गांव अब पालघर बनने को तैयार हैं।
अभी भी समय है सभी सावधान हो जाओ एवं धर्मनिरपेक्ष लोग सुधर जाओ नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब इस देश से हिन्दुओं का नामोनिशान मिट जाएगा।

Facebook Conversations