रायपुर ,में बीजेपी विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Dharamlal Kaushik से मोबाइल लूटने के मामले में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए महज 8 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई को लेकर जहां पुलिस की तत्परता की चर्चा हो रही है, वहीं विपक्ष ने आम नागरिकों के मामलों में ऐसी सक्रियता नहीं दिखाए जाने पर सवाल उठाए हैं। मामला राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित पीडब्ल्यूडी ब्रिज के पास का है।
जानकारी के अनुसार घटना के बाद रायपुर पुलिस तत्काल हरकत में आ गई। लूट की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त, क्राइम ब्रांच और साइबर सेल समेत 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जांच के दौरान केनाल रोड पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में आरोपी के भागने का फुटेज मिला, जिसके आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।
पुलिस ने फुटेज में दिखाई दे रहे कपड़ों और वाहन के आधार पर आरोपी की पहचान की। इसके बाद वाहन नंबर ट्रेस कर आरोपी तक पहुंचा गया। पुलिस टीम ने खम्हारडीह थाना क्षेत्र के राजीव नगर इलाके में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मणिकांत ध्रुव बताया, जिसकी उम्र 19 वर्ष है। आरोपी पेशे से रैपिडो राइडर बताया जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले किसी अन्य आपराधिक घटनाओं में शामिल रहा है या नहीं।
इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की सक्रियता साफ तौर पर देखने को मिली। डीसीपी सेंट्रल उमेश गुप्ता और एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच की निगरानी की। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई के कारण आरोपी को कम समय में पकड़ने में सफलता मिली।
हालांकि इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता Vikas Upadhyay ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनता के मामलों में ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई जाती। उन्होंने कहा कि एक वीआईपी व्यक्ति का मोबाइल चोरी होने पर कुछ ही घंटों में पुलिस की पूरी टीम सक्रिय हो गई और आरोपी पकड़ लिया गया, लेकिन आम लोगों के मोबाइल चोरी या गुम होने के मामलों में उन्हें सिर्फ शिकायत नंबर और इंतजार मिलता है।
विकास उपाध्याय ने बयान जारी करते हुए कहा कि इस मामले में 2 डीसीपी, 2 एडीसीपी, 3 थाना प्रभारी और करीब 30 से 40 जवान तुरंत एक्टिव हो गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या आम नागरिकों के मोबाइल कम महत्वपूर्ण हैं? उन्होंने कहा कि प्रदेश के आम लोगों को भी अपने चोरी या गुम हुए मोबाइल वापस दिलाने की मांग करनी चाहिए।
यह मामला अब सिर्फ मोबाइल लूट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस व्यवस्था और वीआईपी मामलों में त्वरित कार्रवाई को लेकर भी बहस का विषय बन गया है। एक ओर पुलिस अपनी सफलता को बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आम और खास के बीच फर्क का उदाहरण बता रहा है। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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