कहां मर गई है इंसानियत? नवविवाहिता को दहेज़ के भूखों ने पिला दिया तेजाब, गले से लेकर 8 आंत तक जल गयी 41 दिनों के संघर्ष के बाद न्याय की आस लिए हो गयी दुनिया से विदा....
त्वरित खबरें निशा विश्वास ब्यूरो प्रमुख रिर्पोटिंग

कहां मर गई है इंसानियत? नवविवाहिता को दहेज़ के भूखों ने पिला दिया तेजाब, गले से लेकर 8 आंत तक जल गयी 41 दिनों के संघर्ष के बाद न्याय की आस लिए हो गयी दुनिया से विदा....

यूपी गजियाबंद यह घटना जो दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार हुई मेरठ की सरिता की बर्बाद हुई जिंदगी और उनकी मां का न्याय के लिए संघर्ष अत्यंत दुखद है। आई घटना को और विस्तार से समझते हैं।

घटना का सारांश सरिता का विवाह: 

सरिता की शादी फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हुई थी उसके पति धर्मेंद्र के बारे में बिचौलिए ने गलत जानकारी दी जिसमे कहा गया था कि उसके पास अपना घर और अच्छी नौकरी है हकीकत में धर्मेंद्र किराए के घर में रह रहा था। 

शादी के बाद का जीवन: 

शादी के 1 महीने बाद से सरिता के ससुराल वाले दहेज की मांग करने लगे उसके भाई नरेंद्र ने बताया कि वह ₹100000 और बाइक की मांग कर रहे थे जब सरिता ने अपने मन को बताया कि उसके पास पैसा नहीं है तब उसके ससुराल वाले उसे मरते पीते थे सरिता की मां ने आरोप को लगाया कि उसके पति धर्मेंद्र का अपनी भाभी अनीता के से अनैतिक संबंध है जिसके कारण वह अपनी पत्नी को घर में नहीं रखना चाहता था। 

तेजाब का हमला:

16 अगस्त को सरिता के पति और जेठानी ने उसे तेजाब पिलाया। इस पर पुलिस ने शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और सरिता को फिर से ससुराल भेज दिया गया अच्छे दिन तक बिना इलाज के रखा गया फिर सरिता को इस स्थिति में अस्पताल लाया गया लेकिन ससुराल वालों ने उसे फिर से मायके भेज दिया कहने लगे इस जिंदा लाश का हम क्या करेंगे। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर के अंदर गले से लेकर आंत तक जलने के कारण गंभीर चोटे आई सर्जरी करनी होगी बचने की संभावना काफी कम है।

पुलिस और न्याय कासंघर्ष: 

जब सरिता की हालत और खराब हुई तो उसके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की, सरिता केवल ग्लूकोज और पानी पर निर्भर थी। और उसे जीवन रहने के लिए संघर्ष करना पड़ा तथा 29 सितंबर को उसकी सर्जरी होनी थी। 

 लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई।

मां का संघर्ष: 

सरिता की मां शशि, न्याय की गुहार लगाते हुए, अपनी बेटी की लाश को लेकर पुलिस के पास गई उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को ससुराल वालों ने तेजाब पिलाया था। और उसे पर न्याय की मांग करते हुए दम तोड़ दिया जब उन्होंने पुलिस थाने के बाहर धरना दिया तब जाकर मामले में सुनवाई हुई। और आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।

जायज और कार्यवाही: 

पुलिस  कार्यवाही: सरिता की मौत के बाद पुलिस में उसके परिवार और जेठानी को गिरफ्तार कर लिया।जबकि जेठ फरार है। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है।लेकिन परिवार को अभी भी न्याय की प्रतीक्षा है।

समाज में जागरूकता: 

यह मामला केवल सरिता का नहीं,बल्कि ऐसे कई मामलों का प्रतिनिधित्व करता है। जहां महिलाओं दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार होती है समाज को इन मुद्दों पर ध्यान देने और अल्लाह नकारात्मक परंपराओं के खिलाफ खड़ा होने की आवश्यकता है। सवाल यह है कि आखिर कब दहेज के तनाव हमारी बेटियों के साथ इतनी बर्बरता करते रहेंगे।जरा सोचिए तेजाब के किसी अंग पर छिपे आने से ही इंसान की हालत खराब हो जाती है 41 दिन तक सरिता के कैसे संघर्ष किया होगा?

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