जबलपुर के एक युवा ने एक ऐसा ड्रोन बनाया हैं जिससे किसानों को फायदा होगा
त्वरित ख़बरें - ड्रोन जो फसलों में कीट-पतंगों और रोगों की पहचान कर किसानों को अलर्ट करेगा

जबलपुर के एक युवा ने एक ऐसा ड्रोन बनाया है, जो फसलों में कीट-पतंगों और रोगों की पहचान कर किसानों को अलर्ट करेगा। फसल के किस हिस्से में कीटनाशक की जरूरत है। खाद की कितनी मात्रा चाहिए? ये भी बता देगा। इस ड्रोन को बनाने वाले इंजीनियर ने आयरन मैन मूवी देख उसी की तरह उड़ने की ख्वाहिश की थी। हालांकि अब उसने अपने सपनों की उड़ान से किसानों को ड्रोन टेक्नीक से फायदा पहुंचाते हुए कमाई का नया फंडा खोजा है। खेती-किसानी में ड्रोन कैसे भूमिका निभाता है? जानते हैं 

इंदौर से बीटेक थर्ड ईयर की पढ़ाई कर रहे अभय के मुताबिक 2009 में स्कूल के दिनों में उन्होंने आयरन मैन मूवी देखी थी। तभी तय कर लिया था कि मैं भी उड़ान भरूंगा। एयरफोर्स में जाना चाहता था, पर हाथ फ्रैक्चर हो गया। ये सपना टूटा तो ड्रोन को लेकर दिलचस्पी जगी। इंटरनेट से सीख कर स्कूल डेज में ही ड्रोन तैयार कर लिया। इसी बीच IIT बेंगलुरु में सिलेक्शन हो गया। डेढ़ साल तक वहां पढ़ाई की। ड्रोन टेक्नीक की कई बारीकियां सीखीं। IIT की पढ़ाई बीच में ब्रेक कर घर लौट आया।

दोस्त से मिली प्रेरणा, खेती से जोड़कर टेक्नीक डेवलप की अभय ने बताया कि 11वीं में पढ़ाई के दौरान वह दोस्तों के साथ खेत घूमने गए थे। एक दोस्त ने कहा कि काश कुछ ऐसा होता कि फसल में रोग लगने से पहले ही पता चल जाता। इसके बाद ही उन्होंने कृषि से जोड़कर ड्रोन टेक्नीक पर काम शुरू किया। 2017 में दो तरह के ड्रोन तैयार किए। एक ड्रोन 1.2 किलो का है। इसकी कीमत 1.80 लाख रुपए है। दूसरा ड्रोन 800 ग्राम का है। इसकी कीमत 72 हजार रुपए के लगभग है। इस ड्रोन में फ्लाइट कंट्रोलर, वीडियो के लिए टेली मैट्री सिस्टम, आर्थो मोजेक जनरेटर एल्गोरिदम लगाया है।

दो मिनट में एक एकड़ खेत का हर हिस्सा कवर
इस ड्रोन में सेंसर, कैमरा लगा है। यह ऑटोमैटिक है। बस इसे खेत में ले जाकर गूगल मैपिंग पर प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है। फिर ये ड्रोन दो मिनट में एक एकड़ खेत का पूरा चक्कर लगाकर हर हिस्से को अपने कैमरे में कैद कर लेता है। इसके बाद इस कैमरे की रिकॉर्डिंग की सॉफ्टवेयर की मदद से डिटेलिंग की जाती है। इमेज रिकॉगनाइज्ड टेक्नीक से ये पता चल जाता है कि फसल में खाद चाहिए कि कीटनाशक।

बीमारी की फर्स्ट स्टेज में ही करेगा किसानों को अलर्ट
ये ड्रोन फसल की पत्तियों को देखकर ये पता लगा लेता है कि उसे किस रासायनिक खाद की जरूरत है। खेत में पानी की कमी है, तो ये भी बता देगा। इसी तरह कोई कीट या पतंग या अन्य रोग लगा है, तो उसे भी चिन्हित कर लेगा। इसकी रिपोर्ट किसान को समय रहते मिल जाएगी। कोई भी रोग खेत के किसी एक हिस्से से शुरू होकर पूरे खेत में फैलता है। ड्रोन बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर किसान को अलर्ट कर देगा।

किसानों को इस तरह होगा फायदा
किसानों को इस ड्रोन तकनीक से बहुत फायदा होगा। बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में खेत के एक खास हिस्से में ही कीटनाशक डालकर उसका उपचार कर पाएंगे। ऐसे में कम कीटनाशक लगेगा। इसी तरह फसल में किस पोषक तत्व की कमी है, ये पता चलने पर उसी खाद को एक निश्चित मात्रा में किसान डाल सकेगा। उसे बेवजह खाद का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जिससे उसकी बचत होगी। समय रहते रोग की पहचान और उपचार से फसल प्रभावित नहीं होगी।

500 रुपए किराए पर भी किसान ले सकेंगे सेवा
इस ड्रोन तकनीक की सेवा किसानों को किराए पर भी मिलेगी। यह 500 रुपए के बेस प्राइस पर किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। इसमें एक एकड़ का खेत शामिल है। इससे अधिक खेत होने पर 50 रुपए प्रति एकड़ और देना होगा। ये सेवा एक महीने के लिए है। किसान इसी दर से आगे के महीने के लिए भी अनुबंध कर सकता है। एक फसल के लिए दो हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इसकी भरपाई और फायदा कास्ट कटिंग से किसान को होगा। सेवा लेने वाले किसान के खेत की हर तीसरे दिन ड्रोन से मॉनिटरिंग की जाती है। इसका रिजल्ट मोबाइल पर रिपोर्ट भेजकर किसान को बताया जाता है।

ड्रोन की ये है खूबियां

  • ड्रोन की कीमत:1.80 लाख रुपए
  • ड्रोन का वजन: 1.2 किलो
  • एक एकड़ खेत की मॉनिटरिंग 2 मिनट में कर लेता है
  • ड्रोन की बैटरी क्षमता: 30 मिनट
  • रिपोर्ट प्राप्त होती है: 3 घंटे में

ड्रोन पेटेंट कराने की चल रही प्रोसेस
इस ड्रोन को एग्रीकल्चर स्वान ड्रोन नाम दिया गया है। इसके पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है। इस इनोवेशन को जबलपुर स्मार्ट सिटी द्वारा संचालित इन्क्यूबेशन सेंटर की मदद मिल रही है। इन्क्यूबेशन सेंटर के मैनेजर अग्रांशु द्विवेदी के मुताबिक खेती-किसानी में तकनीक का मेल किसानों के लिए और युवाओं के लिए नए रोजगार के रूप में सामने आया है।

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