होली के अवकाश के बाद आज से विधानसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो रही है। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, लेकिन सबसे अधिक जिस विषय पर सदन के गरमाने के आसार हैं, वह है अफीम की खेती का मुद्दा। प्रदेश में पिछले कुछ समय से अफीम की अवैध खेती और उससे जुड़े मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आज सदन में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।दरअसल, अफीम की खेती भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुमति लेना आवश्यक होता है। यह खेती मुख्य रूप से औषधीय उपयोग के लिए की जाती है और इसकी निगरानी सख्त नियमों के तहत होती है। जिन किसानों को लाइसेंस दिया जाता है, वे निर्धारित क्षेत्र में ही अफीम की खेती कर सकते हैं। लेकिन कई बार यह आरोप सामने आते रहे हैं कि कुछ जगहों पर बिना लाइसेंस के या निर्धारित सीमा से अधिक क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में अफीम की अवैध खेती पर नियंत्रण पर्याप्त रूप से नहीं हो पा रहा है और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था भी कई जगह कमजोर साबित हो रही है। विपक्ष यह भी सवाल उठा सकता है कि आखिर किन क्षेत्रों में अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं और इन पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। साथ ही यह मांग भी की जा सकती है कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट नीति और कड़े कदम उठाए।वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर जवाब देने की पूरी तैयारी की जा रही है। सरकार यह बताने की कोशिश करेगी कि अफीम की खेती पर नियंत्रण के लिए प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है और जहां भी अवैध खेती की सूचना मिलती है, वहां तुरंत जांच और कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा सरकार यह भी बता सकती है कि लाइसेंस प्राप्त किसानों की सूची, खेती का क्षेत्र और निगरानी की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
सदन में इस विषय पर चर्चा के दौरान कानून व्यवस्था, किसानों की स्थिति और प्रशासनिक निगरानी जैसे कई पहलुओं पर भी बात हो सकती है। कुछ सदस्य यह भी मुद्दा उठा सकते हैं कि जिन क्षेत्रों में परंपरागत रूप से अफीम की खेती होती रही है, वहां किसानों को वैकल्पिक फसल या बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे अवैध गतिविधियों की ओर न बढ़ें।कुल मिलाकर होली के अवकाश के बाद शुरू हो रहे इस विधानसभा सत्र में अफीम की खेती का मुद्दा प्रमुख रूप से उभर सकता है। सरकार और विपक्ष दोनों ही इस विषय पर अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे, जिससे सदन में राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहने की संभावना है। इसके साथ ही अन्य जनहित के मुद्दों और विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

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