12 अक्टुबर 2022
बुधवार को पूरे प्रदेश से प्रेरक (ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता के लिए लोगों को पढ़ाने वाले) रायपुर पहुंचे। यहां धरना स्थल पर सभी ने नारेबाजी करते हुए नौकरी की मांग की। साल 2018 के पहले से ही इनकी मांग उठ रही थी, चुनावी साल था तो कांग्रेस ने वादा किया जो अब तक अधूरा है। अब एक बार फिर प्रेरक पूरे प्रदेश में आंदोलनों के जरिए मांगें मनवाने की कोशिश में हैं।
मंगलवार को हुए आंदोलन के बीच प्रेरक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप द्विवेदी मंच से भाषण दे रहे थे। अपनी बात रखते हुए जब माइक डायस पर हाथ पटका तो चोटिल हो गए। हाथ से खून बहने लगा, फिर बोले हम अपना खून बहाने को राजी हैं। मगर इसके बाद भी हमें नौकरी नहीं मिल रही।

अफसरों को ज्ञापन सौंपा।
बकियों ने लड्डुओं से तोला था हमने तो कई लीटर लहू दिया
प्रेरक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप द्विवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कई संगठनों ने CM का स्वागत किया। अलग-अलग संगठनो ने उन्हें लड्ड़ू-काजू से तौला था। तब उनके वजन के बराबर करीब 80 किलो से अधिक खून प्रेरकों ने दान कर दिया था। संघ के अनुसार प्रेरकों ने 2019 में 350 यूनिट ब्लड डोनेट किया था।
2 महीने का अल्टीमेटम
प्रेरकों ने अपनी मांग रखते हुए प्रशासन को ज्ञापन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 2 माह के भीतर यदि नौकरी पर फैसला नहीं होता तो जल्द ही विधानसभा घेराव कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रेरकों की मांग है कि इन्हें फिर से काम पर रखा जाए। दरअसल 31 मार्च 2018 से इन्हें काम से हटा दिया गया। अब प्रेरकों का कहना है कि सरकार बनने से अब तक की अवधि का मानदेय 2500 रू महिना की दर से दिया जाए। इन्हें फिर से काम पर रखा जाए।
प्रदेश में 16 हजार से अधिक प्रेरक
प्रेरक पंचायत कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के मुताबिक 16800 ग्रामीण प्रेरकों की भर्ती साल 2009 में साक्षरता अभियान के लिए की गई थी। जिसमें उन्हें 18 से 45 साल के उम्र के लोगों को पढ़ाना था। इसके साथ ही ये केंद्र और राज्य सरकारों के अनेक योजनाओं के संचालन में मदद किया करते थे।

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