राजनांदगांव जिले के छुरिया क्षेत्र के जंगलों में तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र में तेंदुए को देखा गया है, जिसके बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है। जंगल से सटे इलाकों में लोग सहमे हुए हैं और शाम होते ही आवाजाही लगभग बंद हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आरोप है कि वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते निर्माण कार्य और कमजोर निगरानी के कारण जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है।
इसके चलते जंगली जानवर भोजन, पानी और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय और राज्य पोषित योजनाओं के तहत जंगलों में कई कार्य केवल कागजों में दिखाए जाते हैं। न तो उनकी गुणवत्ता की जांच होती है और न ही जमीनी हकीकत की समीक्षा।
वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) की जिम्मेदारी जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण की होती है। इसके तहत वन विभाग को एंटी-पोचिंग कैंप, कैमरा ट्रैप, ड्रोन और जीपीएस के माध्यम से निगरानी, अवैध शिकार पर कार्रवाई, बीमार व घायल वन्यजीवों का उपचार और रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित करना होता है।
यह सभी कार्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय जिम्मेदारियां अब जमीनी कार्रवाई के बजाय बैठकों और औपचारिकताओं तक सिमटकर रह गई हैं।
कार सवार युवकों पर तेंदुए ने किया था हमला
छुरिया क्षेत्र में बीते दिनों कार से घूमने निकले कुछ युवकों पर तेंदुए ने अचानक हमला करने की कोशिश की थी। युवक रास्ते में टॉयलेट के लिए रुके ही थे। तभी झाड़ियों से निकले तेंदुए ने उन पर झपट्टा मार दिया। युवक जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़कर छिप गए। इस घटना में एक व्यक्ति के घायल होने की भी सूचना है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
रेस्क्यू टीम तैनात करने करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ रही वन्यजीवों की गतिविधियों से आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। शाम होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि यदि जंगलों में समय रहते वन्यजीवों के लिए पानी, भोजन, सुरक्षा और आवास की समुचित व्यवस्था की गई होती, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षेत्र में तत्काल निगरानी बढ़ाने, रेस्क्यू टीम तैनात करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाना अब जरूरी हो गया है।

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