भिलाई, में महिलाओं की सुरक्षा और सहायता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘अतिरिक्त सखी वन स्टॉप सेंटर’ का भव्य शुभारंभ किया गया। यह केंद्र घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा और अन्य संकटों से पीड़ित महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस सेंटर का उद्घाटन वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने किया। उद्घाटन समारोह के दौरान विधायक रिकेश सेन ने कहा कि यह सेंटर भिलाई-दुर्ग क्षेत्र की महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगा और अब संकट में फंसी महिलाओं को सहायता के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है और इस प्रकार के केंद्र समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। समारोह में अधिकारियों ने जानकारी दी कि ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस सहायता, कानूनी सलाह, चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पांच दिन तक अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह सेंटर 24 घंटे और सातों दिन निःशुल्क सेवाएं प्रदान करेगा ताकि किसी भी समय संकट में फंसी महिला तुरंत सहायता प्राप्त कर सके। सेंटर का संचालन स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल परिसर, फरीद नगर थाना सुपेला, जिला दुर्ग में किया जाएगा। महिलाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 181 भी जारी किया गया है, जिस पर संपर्क कर तुरंत मदद प्राप्त की जा सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस सेंटर का उद्देश्य केवल कानूनी और चिकित्सीय सहायता देना ही नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी आर.के. जांबुलकर, परियोजना अधिकारी अनीता सिंग, केंद्र प्रशासक कविता बघेल, अवंती साहू, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, पुलिस विभाग के अधिकारी और सखी सेंटर के कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई महिला किसी प्रकार की हिंसा या संकट का सामना कर रही हो तो तुरंत सखी सेंटर या हेल्पलाइन 181 पर सूचना दें। विभाग ने कहा कि एक फोन कॉल किसी महिला की जिंदगी बचा सकती है। इस पहल से महिलाओं को न केवल त्वरित सहायता मिलेगी बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल भी मजबूत होगा।
त्वरित ख़बरें (अरुण रिपोर्टिंग )

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