भिलाई - थाना प्रभारी सुरेश कुमार ध्रुव के जादू से गायब हुआ एफ. आई. आर.
त्वरित ख़बरें - एक प्रार्थी पूछ रहा हैं , कहाँ गई मेरी एफ. आई. आर.

भिलाई - पुलिस कार्यवाही के विभिन्न कारनामे समय-समय पर सुर्खियों में रहते, ऐसा ही एक गंभीर वाक्या दुर्ग जिले के खुर्सीपार थाने में नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुये लोक दस्तावेजों के साथ छ़ेड़छाड़ करते हुये पद और संरक्षण का लाभ उठाते हुये छोटे कर्मचारी की सही कार्यवाही का इनाम उसे लाइन भेजकर दंडित करने जिसे पुलिस की भाषा रूटीन कार्यवाही का नाम दिया। जिले में पदस्थ वर्तमान थाना प्रभारी सुपेला जब खुर्सीपार थाने में पदस्थ मात्र एक वर्ष पूर्व रहे प्रभारी कार्यकाल में ऐसा कारनामा हुआ जिस कारनामे को जानकर आपको भी सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा कि वाकई थाने में सांप को रस्सी और रस्सी को सांप कैसे कागजी कार्यवाही में बिना भय, नियम, कानून को तोड़ते हुए कर दिया जाता है, पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही से यह लगता है कि राजस्व विभाग में ही कागजों में हेरफेर किया जाता था | पर उस भ्रांति को खुर्सीपार पुलिस की सुरेश कुमार ध्रुव के प्रभार में रहने के दौरान कार्यवाही से आंकलन करने पर गलत साबित हो सकती है। 

  पुलिस विभाग में उपयोग में लाये जाने वाले दस्तोवज महत्वपूर्ण दस्तावेजों की श्रेणी में आते हैं, उन लोक दस्तावेज, न्यायालय भी विश्वास करता है, आपराधिक कार्यवाही की प्राथमिक सीढ़ी प्रथम सूचना पत्र होती है। यदि किसी एक अपराध क्रमांक में दो प्रथम सूचना रिपोर्ट पृथक-पृथक प्रार्थियों की रिपोर्ट पर अलग - अलग प्रथम सूचना पत्र लेखकों द्वारा दर्ज की जाये, दोनों प्रार्थियों को उसकी सत्यापित प्रति भी नियम तहत प्रदान की जाये किंतु बाद में यह जानकारी मिला कि दर्ज एक प्रथम सूचना रिपोर्ट रोजनामचासान्हा और प्रथम सूचना पत्र जादू से गायब हो जाये, पहले रिपार्ट दर्ज कराने वाला प्रार्थी अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट की कॉपी लेकर यह पूछता फिरे कि मेरा मामला किस जादूगर की जादूगिरी से गायब हो गया? जिस अधिकारी ने उस पीड़ित प्रार्थी की रिपोर्ट विधिवत विभागीय नियम अनुरूप दर्ज की हो वह अधिकारी भी आश्चर्य चकित हो जाये कि सरकारी दस्तावेजों में उसके द्वारा दर्ज पीड़ित की रिपोर्ट विलुप्त कैसे हो गयी जिसकी एक प्रति उसके द्वारा प्रार्थी को दी गई थी, ऐसा दस्तावेज रोजनाचासान्हा प्रथम सूचना पत्र जिसकी विश्वसनीयता प्रथम दृश्टि न्यायालय भी मानता है और बिना न्यायालय के निर्देष की आपराधिक मामले में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट का खात्मा नहीं किया जाता मामला दर्ज होने उपरांत मात्र कुछ ही घंटों में एक शिकायतकर्ती की शिकायत पर दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट का मामला समाप्त हो गया और पीड़ित हाथ में दूसरे दिन ही प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति लेकर न्याय की आस में घूमता रहा हो इस प्रकार की कार्यवाही को त्वरित न्याय कहें या अन्याय, फैसला मात्र कुछ घंटों में खुर्सीपार पुलिस के प्रभारी के नियंत्रण निर्देशन के बिना संभव ही नहीं हो सकता, ऐसा ही कुछ दुष्साहसपूर्ण काम कानून का भय नहीं वरिष्ठ अधिकारियों व न्यायालय की जानकारी के बिना,नियम विरूद्ध काम अपने पद का दुरूपयोग करते हुये शासकीय दस्तावेजों को निजी संपत्ति समझते हुये मेरी मर्जी के अनुरूप सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर किया गया है और पहले दर्ज अपराध क्रमांक की प्रथम सूचना से संबंधित दस्तावेज जो थाने में मौजूद रहे उन्हें कूटरचना कर बदल दिया गया। 

  थाने का जवाबदार लोकसेवक प्रभारी होता है, किसी भी छोटे कर्मचारी को आदेश निर्देश और कार्य का नियंत्रण प्रभारी के निर्देशन पर होता है। शासकीय कार्य में की जा रही अनियमितता व नियम विरूद्ध गलत कार्यवाही का एकमात्र जवाबदार संबंधित थाने का प्रभारी ही होता है। सुरेश कुमार ध्रुव वर्ष 2020 में खुर्सीपार थाना जिला दुर्ग के प्रभारी के रूप में कार्यरत रहे जो वर्तमान में सुपेला थाना जिला दुर्ग में पदस्थ है। उनके प्रभार वाले खुर्सीपार थाने में ऐसा कारनामा किया गया कि प्रभारी की मर्जी से किसी भी दस्तावेज में कूटरचना विलोपन महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज रोजनामचासान्हा में छेड़छाड़ का खेल किया जा सकता है। बिलासपुर निवासी देवशरण दुबे पिता मोतीलाल दुबे दिनांक 24.11.2020 को खुर्सीपार सिग्नल चौक क्षेत्र में अपनी कार से खड़े थे तभी पीछे से ट्रक क्रमांक एम.एच. 19 जेड. 5647 के चालक ने लापरवाहीपूर्वक तेज गति से ठोकर मारी जिस पर फरियादी के द्वारा थाने में सूचना दर्ज 13.05 मिनट दिनांक 24.11.2020 को कराई रिपोर्ट उस दौरान पदस्थ उप-निरीक्षक के द्वारा अपराध क्र. 713/20 में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज धारा 279 में की शासन के नियमानुसार प्रथम सूचना पत्र की एक प्रति प्रार्थी देवशरण दुबे को भी प्रदान की। पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण दस्तावेज रोजनामचासान्हा में भी उक्त सूचना का हवाला देते हुये लिपिबद्ध किया गया किंतु अभी तो खेल होना बाकी था। दूसरे दिन गिनिज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होने वाली आश्चर्यजनक घटना हो गई। पूर्व फरियादी देवशरण दुबे की लोक दस्तावेजों में लेखबद्ध अपराध आश्चर्यचकित ढंग से गायब हो गया और पुनः अपराध क्र. 713/20 दिनांक 24.11.2020 में हेर-फेर करते हुये थाने में सूचना प्राप्त होने के समय को यथावत रखते हुये पूर्व प्रथम सूचना लेखक का नाम भी दस्तावेजों से विलोपित करते हुये नये प्रथम सूचना पत्र लेखक सतीश साहू द्वारा अन्य प्रार्थी मृणाल पिता अशोक कुमार चन्द्राकर की रिपोर्ट के अनुसार मोटर सायकल से दुर्ग की ओर जाते समय पीछे से मारूति सुजुकी बलोनो कार क्र. सी.जी. 07 बी.यू. 9713 के चालक ने तेज रफ्तार, लापरवाहीपूर्वक घटना कारित की जिस पर दिनांक 25.11.2020 को धारा 279, 337 का अपराध दर्ज उसी अपराध क्रमांक 713/20 थाने पर सूचना प्राप्त होने का समय 13.05 मिनट दर्शाते हुये शासन के नियमानुसार छत्तीसगढ़ पुलिस के पोर्टल पर दिखने लगी, पूर्व प्रथम सूचना पत्र जो देवशरण दुबे की प्रथम सूचना पत्र 713/20 गायब हो गई। देवषरण दुबे ने घटना में घटना कारित करने वाले जिस ट्रक क्रमांक का उल्लेख किया गया वह भी गायब हो गया। घटना का प्रार्थी देवषरण दुबे भी जिसका उल्लेख शासकीय दस्तावेजों में किया गया था वह भी गायब हो गया, पूर्व प्रथम सूचना दिनांक 24.11.2020 अपराध क्र. 173/20 लेखक, तारीख, समय व धारा लेखबद्ध थी वह भी लेख दस्तावेजों से विलोपित हो गया। यह घटना अपने आप में आश्चर्यजनित करने वाली थी जिस पर त्वरित खबरों के खोजी पत्रकारों को मिली जानकारी के अनुसार देवशरण दुबे की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने वाले ईमानदार अधिकारी द्वारा पूर्व दर्ज अपराध के संबंध में जब प्रभारी को जानकारी दी तो उस ईमानदार अधिकारी को प्रभारी के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा, उसे ईमानदारी की सजा भुगतते हुये लाइन अटैच कर दिया गया प्रथम सूचना दर्ज करने वाले प्रार्थी और ईमानदार प्रथम सूचना लेखक अधिकारी के साथ बिना विलंब किये तत्काल पद, प्रभाव, संभवतः संरक्षण के संभव न होने वाला कार्य कर दिया गया जो कि किसी चमत्कार से कम नहीं है। त्वरित खबरें समाचार के पास वे सारे दस्तावेज उपलब्ध हैं जो इस कानूनी प्रक्रियाओं की मनमर्जी से धज्जी उड़ाने के सत्य को उजागर करते हुये सामाचार पत्र अपने सामाजिक और नैतिक दायित्वों को पूरा करते हुये यह अपेक्षा रखता है कि राज्य व जिले के वरिश्ठ अधिकारी प्रक्रिया का दुरूपयोग, पद का अहंकार, जनता के मन में पुलिस कार्यवाही के प्रति अविश्वाश पैदा करने वाली खबर से विश्वास कायम करने के लिये सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने वाले प्रभारी और उसके सहयोगी के विरूद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने का साहस दिखा पायेंगे वैसे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, जो कि न्यायप्रिय हैं उनके राज्य में पुलिस विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी जी.पी. सिंह के विरूद्ध आपराधिक मामला थाने में दर्ज किया गया जिनका छत्तीसगढ़ में कभी अपना रसूक रहा है | उसी प्रकार दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर कानून की धज्जियां उड़ाने वाले (खुर्सीपार प्रभारी) वर्तमान में सुपेला थाना प्रभारी के विरूद्ध थाने में आपराधिक मामला दर्ज कर न्याय की मिसाल को अवष्य पूरा करेंगे। वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग जिस मंत्री के अधीन हैं वे भी दुर्ग जिले की निवासी हैं उनके क्षेत्र में इस प्रकार की थाने के अंदर सुरक्षित लोक दस्तावेजों में जिन पर न्यायालय भी विश्वास करता है छेड़छाड़ की दुष्साहसपूर्ण अनोखी घटना का षड्यंत्र करने वाले प्रभारी के विरूद्ध समय निर्धारित कार्यवाही का निर्देष देंगे।

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