बालोद। बेटियों को शिक्षा के साथ रोजगार और करियर के बेहतर अवसरों से परिचित कराने के उद्देश्य से बालोद जिले में ‘बिटिया@वर्क’ अभियान की शुरुआत की गई है। जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह के अवसर पर कांकेर सांसद भोजराज नाग ने गुब्बारे छोड़कर इस अभियान का शुभारंभ किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है।
अभियान के तहत छात्राओं को संयुक्त जिला कार्यालय का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण से मुलाकात की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, शासकीय सेवाओं और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्राओं ने अधिकारियों से सीधे सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
कलेक्टर ने छात्राओं को बड़े सपने देखने के लिए किया प्रेरित
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि बेटियों को अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करनी चाहिए। शिक्षा आत्मनिर्भरता और सफलता का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, नई चीजें सीखने और अपनी रुचि एवं योग्यता के अनुसार करियर चुनने की सलाह दी।
वहीं पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण ने छात्राओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अधिकारियों से मिली प्रशासनिक सेवाओं की जानकारी
भ्रमण के दौरान छात्राओं ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील कुमार चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य और हरिवंश सिंह मिरी से भी मुलाकात की। अधिकारियों ने उन्हें विभिन्न विभागों के कामकाज, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बारे में बताया। साथ ही शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में करियर बनाने की संभावनाओं से भी परिचित कराया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को अभियान के उपहार स्वरूप कप और टी-शर्ट प्रदान की गई। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उनके लिए स्वल्पाहार और भोजन की व्यवस्था भी की गई।
बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
‘बिटिया@वर्क’ अभियान के माध्यम से छात्राओं को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में उपलब्ध करियर विकल्पों और रोजगार के अवसरों को बेहतर ढंग से समझ सकें। इस पहल से बालिकाओं में निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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