दीपावली के पांच दिवसीय पर्व के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने की मान्यता है। इसी खुशी में लोग घरों में दीपक जलाकर खुशियां मनाते हैं।
नरक चतुर्दशी पर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और पूजा करने से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है। शाम को घर के बाहर यम दीपक जलाया जाता है। इसके अलावा लोग घरों में रंगोली बनाते हैं और दीप जलाकर दीपावली के स्वागत की तैयारियां करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। इसके अगले दिन मुख्य दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।