छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब महोत्सव’ का आज समापन होगा। 8 और 9 अगस्त को आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक महोत्सव में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति, लोक नृत्य, संगीत और कला के माध्यम से दर्शकों को जनजातीय समाज की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया।
इस वर्ष आदि परब महोत्सव की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। इस थीम के माध्यम से जनजातीय समाज की पुरानी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और उनके संरक्षण के महत्व को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और लोक जीवन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है।
रायपुर में आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों से पहुंचे आदिवासी कलाकार अपनी-अपनी विशेष सांस्कृतिक परंपराओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, ढोल-नगाड़ों की थाप और जनजातीय नृत्यों ने आयोजन को आकर्षक बना दिया। अलग-अलग राज्यों की जनजातीय संस्कृति को एक मंच पर देखने का अवसर मिला, जिससे देश की विविधता में एकता की झलक भी दिखाई दी।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोक कला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही जनजातीय समुदायों के सामाजिक अधिकारों और उनकी पहचान को मजबूत बनाने के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। प्रदेश में समय-समय पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव जैसे कार्यक्रम भी जनजातीय समुदायों को अपनी कला और संस्कृति प्रदर्शित करने का बड़ा मंच प्रदान करते हैं। इन आयोजनों में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई देशों के जनजातीय कलाकार भी अपनी पारंपरिक संस्कृति, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देते हैं।
रायपुर का आदि परब महोत्सव 2026 भी इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के कलाकारों की भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष बना दिया है। महोत्सव के माध्यम से लोगों को आदिवासी समाज की जीवनशैली, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।
आज महोत्सव के समापन के साथ दो दिनों तक चले इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन का समापन होगा। विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित आदि परब महोत्सव ने रायपुर में जनजातीय संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक नृत्य का एक अनोखा संगम प्रस्तुत किया, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।