कुमारी लेशिका का बी.टेक. में प्रवेश, बौद्ध समाज में हर्ष की लहर सामाजिक सहयोग से आर्थिक बाधा हुई दूर, समाज ने होनहार बेटी के सपनों को दी नई उड़ान...

त्वरित खबरें राहुल ओझा ब्यूरो प्रमुख रिपोर्टिंग

*कुमारी लेशिका का बी.टेक. में प्रवेश, बौद्ध समाज में हर्ष की लहर*

*सामाजिक सहयोग से आर्थिक बाधा हुई दूर, समाज ने होनहार बेटी के सपनों को दी नई उड़ान*

*डोंगरगढ़। प्रतिभा कभी आर्थिक अभाव की मोहताज नहीं होती, यदि समाज उसके साथ खड़ा हो जाए। इसका जीवंत उदाहरण डोंगरगढ़ की होनहार बेटी कु. लेशिका लाऊत्रे ने प्रस्तुत किया है। लेशिका ने CGPET एवं JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर बी.टेक. में प्रवेश का अवसर अर्जित किया था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका सपना अधूरा रह जाने की स्थिति बन गई थी।*

*कु. लेशिका, पिता श्री श्याम कुमार लाऊत्रे, निवासी वार्ड क्रमांक 10, कालका पारा (वर्तमान इंदिरा नगर), डोंगरगढ़, के परिवार से हैं। उनके पिता 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। इसी कारण राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान एनआईटी में चयन होने के बावजूद समय पर आवश्यक शुल्क जमा नहीं हो सका और प्रवेश नहीं मिल पाया।*

*इसके बाद भी लेशिका ने हार नहीं मानी। जब यह जानकारी आदर्श बौद्ध महासभा, नागसेन बुद्ध विहार ट्रस्ट समिति, डोंगरगढ़ तथा समाज के प्रबुद्धजनों तक पहुँची, तो पूरे समाज ने एकजुट होकर इस प्रतिभाशाली बेटी की शिक्षा का दायित्व उठाने का संकल्प लिया।*

राजनांदगांव जिले के उपासक-उपासिकाओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं दानदाताओं ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सीधे लेशिका के बैंक खाते में आर्थिक सहयोग प्रदान किया। समाज के इस सामूहिक प्रयास से बी.टेक. प्रवेश के लिए आवश्यक राशि जुटाई गई, जिसके फलस्वरूप लेशिका का छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT), रायपुर में कंप्यूटर एंड डेटा साइंस बी.टेक. पाठ्यक्रम में सफलतापूर्वक प्रवेश हो गया।*

*लेशिका के प्रवेश की खबर से पूरे बौद्ध समाज में हर्ष और गर्व का वातावरण है। समाज के लोगों ने इसे केवल एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और मानवता की जीत बताया। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि लेशिका अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर भविष्य में एक सफल इंजीनियर बनकर समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगी।*

*इस अवसर पर आदर्श बौद्ध महासभा एवं नागसेन बुद्ध विहार ट्रस्ट समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति किसी एक जरूरतमंद विद्यार्थी की शिक्षा का संकल्प ले, तो कोई भी प्रतिभा केवल आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से वंचित नहीं रहेगी।*

*समिति ने समाज के सभी नागरिकों से भविष्य में भी ऐसे मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग करने का आह्वान किया, ताकि शिक्षा के माध्यम से समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।*

शिक्षा का दान सबसे बड़ा दान - अमिताभ दुफारे

राजनांदगांव जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा की गई अनुकरणीय पहल से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों में  शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ेगी। क्योंकि शिक्षा का दान सबसे बड़ा दान होता है। किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की शिक्षा में किया गया आर्थिक सहयोग केवल उसकी फीस नहीं भरता, बल्कि उसके पूरे जीवन को नई दिशा देता है। सामाजिक कार्यकर्ता श्री दुफारे ने आगे कहा कि,समाज की यही एकजुटता भविष्य के उज्ज्वल भारत की आधारशिला बनेगी।