उत्तराखंड में तीर्थयात्रियों से भरी बस खाई में गिरने से 26 लोगों की मौत
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 7 जून 2022

उत्तराखंड में रविवार रात को तीर्थयात्रियों से भरी बस खाई में गिरने से 26 लोगों की मौत हो गई थी। आज इस घटना को दो दिन हो गए हैं। अब कई इमोशनल बातें सामने आ रही हैं। जैसे ये सभी लोग तीर्थयात्रा पर जा सकें, इसके लिए परिजन ने काफी मशक्कत की थी। किसी ने माता-पिता को तीर्थ कराने के लिए रुपए उधार लिए, तो किसी के लिए गांव वालों ने चंदा जुटाकर पैसे इकट्‌ठे किए। कुछ लोग किसी कारण जा नहीं सके, इस कारण उनकी जान बच गई

पन्ना के साटा बुद्धसिंह गांव के राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता राजाराम सिंह, मां गीता सिंह, उनकी बुआ जनक सिंह तीर्थयात्रा पर गए थे। वे बताते हैं कि रोजाना एक-दो बार फोन पर बात हो जाती थी। हादसे के पहले सुबह 11 बजे बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि बस की पासिंग मिल गई है। अब वे केदारनाथ की ओर जाएंगे। शाम 5 बजे के बाद मैंने सोचा कि कठिन मार्ग में जा रहे हैं, हालचाल पूछ लेता हूं। फोन पर रिंग जा रही थी, रिसीव नहीं हुआ।

कुछ देर बाद उदय सिंह नाम के व्यक्ति ने पिताजी का मोबाइल रिसीव किया। उसने बताया कि जिस बस में हमारे सभी साथी थे, वह खाई में गिर गई है। हम भी उसी में थे। बस पलटियां खा रही थी, तब किसी तरह पेड़ से लटककर बच गया हूं। उन्होंने बताया कि मैं भाग्य से बच गया, पैर फ्रैक्चर हो गए हैं। बस 500 फीट की खाई में गिर गई है। किसी का भी बचना मुश्किल है। कैसे और किस जगह हादसा हुआ, वो ये नहीं बता पाए। इसके बाद मैंने तुरंत कलेक्टर को फोन कर बताया। उन्होंने जानकारी लेने का आश्वासन दिया। बताया कि टीम पहुंच गई है। CM के साथ मंत्री पहुंच गए हैं।

रिश्तेदारों और गांववालों ने मिलकर पैसे दिए

राजेंद्र ने बताया कि कोरोना के पहले से माता-पिता का मन तीर्थयात्रा पर जाने का मन था। इस बार मन बनाया कि छोटे भाई की शादी नहीं हुई, तो तीर्थयात्रा कर आ आते हैं। पिता गांव में दवा-इलाज की प्रैक्टिस करते थे। यात्रा के लिए कुछ पैसे जोड़े थे। बाकी रिश्तेदारों और गांववालों ने मिलकर सहयोग कर दिया। करीब 2 लाख रुपए की व्यवस्था की। 44 हजार रुपए का तो टिकट ही था। बाकी जरूरत के लिए रखे थे। प्रशासन ने अभी वहां जाने से मना किया। कहा कि आप वहां जाकर क्या करोगे? हादसे की मृतक सूची में बुआ का नाम जनक सिंह लिखा है। पुरुष लिखा गया है, जबकि वे महिला हैं।

रात डेढ़ बजे उत्तराखंड के कंट्रोल रूम से मिली सूचना
सिमरिया गांव के प्रशांत गर्ग ने बताया कि तीर्थयात्रा के लिए पिता जागेश्वर प्रसाद गर्ग और माता अनिल कुमारी गए थे। हादसे के पहले शाम करीबन साढ़े 4 बजे उनसे आखिरी बार बात हुई थी। रात डेढ़ बजे उत्तराखंड के कंट्रोल रूम से फोन आया, तो जानकारी मिली। पिता टीचर थे।

इसी तरह, उडला गांव के एक बुजुर्ग भी रिश्तेदारों के साथ जाने वाले थे। तैयारी भी हो गई थी। टिकट भी बुक हो गए थे, लेकिन अंतिम समय में सेहत कुछ ठीक नहीं होने से परिवारवालों ने जाने से मना कर दिया। वहीं, परिवार के उनके छोटे भाई और उनकी पत्नी की हादसे में मौत हो गई।

पिता को आखिरी समय में नहीं जाने दिया, इसलिए बच गए
उडला पडंवन गांव के कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि तीर्थयात्रा में उनके छोटे चाचा राम भरोसे शर्मा और चाची शीलाबाई गए थे। वे पहले भी तीन बार चारधाम की यात्रा करके आ चुके हैं। अब वे चौथी बार जा रहे थे। इसके अलावा, मोहंद्रा से मौसी सरोज कटैहा और मौसिया मैनका प्रसाद भी गए थे। इसके अलावा, मामा हरिनारायण द्विवेदी के परिवार से भी लोग गए थे। हादसे के पहले उनसे रविवार दोपहर करीबन साढ़े 3 बजे बात हुई थी। उन्होंने बताया कि वे ऋषिकेश से निकल गए हैं। अब केदारनाथ की तरफ जा रहे हैं। छोटे भाई ने टीवी में हादसे की खबर देखकर मुझे बताया। इसके बाद से हम उनकी खबर लेने लगे। तीर्थयात्रा के बस एजेंट को फोन लगाया, तो बंद मिला। फिर क्षेत्र के मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने साढ़े 9 बजे सूचना दी कि चाचा-चाची की मौत हो गई है। यात्रा में पिताजी भी साथ में जाने वाले थे, उनकी टिकट भी बुक हो गई थी, तैयारी भी पूरी कर ली गई थी। अचानक पिता की तबीयत खराब होने से अंतिम समय पर मना कर दिया, तो वे नहीं गए।

सबसे ज्यादा मौतें साटा गांव से, मोहंद्रा के 6 तीर्थयात्री थे

हादसे में पन्ना के साटा बुद्ध सिंह गांव के सबसे ज्यादा 8 और मोहंद्रा के 6 तीर्थयात्रियों की मौत हुई। इसके अलावा कोनी, पवई, सिमरिया व उड़ला के 2-2 तीर्थयात्री के साथ चिखला, बिजावर और ककरहटा के 1-1 तीर्थयात्रियों ने जान गंवाई। चिखला के उदय सिंह और उनकी पत्नी हक्की के साथ ककरहटा के राजकुंवर घायल हुए हैं। उनका उत्तरकाशी के अस्पताल में चल रहा है।

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