सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ इसलिए चुनावों को कंट्रोल नहीं कर सकते या निर्देश जारी नहीं कर सकते, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बारे में संदेह उठाया गया है। SC में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने साफ कहा कि हम चुनावों को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। कोर्ट का कहना था कि हम किसी अन्य संवैधानिक अथॉरिटी के कामकाज को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने हमारे संदेह दूर किए हैं. हम आपकी विचार प्रक्रिया को नहीं बदल सकते हैं। हम संदेह के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं।
याचिकाओं में दावा किया गया है कि परिणामों में हेरफेर करने के लिए मतदान उपकरणों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। वहीं कोर्ट ने कहा कि वो वोटिंग मशीनों पर संदेह करने वालों और बैलेट पेपर के जरिए वापस चुनाव कराए जाने की वकालत करने वालों की विचार प्रक्रिया को नहीं बदल सकते हैं।
कोर्ट का कहना था कि हमें और जानकारी चाहिए, क्योंकि हम मामले की तह तक यानी गहनता से जानकारी चाहते हैं। जस्टिस खन्ना ने कहा, हमने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों का अध्ययन किया। हम सिर्फ तीन-चार स्पष्टीकरण चाहते हैं। हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते हैं, लेकिन अपने निष्कर्षों के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने के बारे में सोचा।वर्तमान में वीवीपैट वैरिफिकेशन के तहत लोकसभा क्षेत्र की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सिर्फ पांच मतदान केंद्रों के ईवीएम वोटों और वीवीपैट पर्ची का मिलान किया जाता है। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में सिर्फ पांच रैंडमली रूप से चयनित ईवीएम को सत्यापित करने के बजाय सभी ईवीएम वोट और वीवीपैट पर्चियों की गिनती की मांग करने वाली याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था।

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