स्मृति ईरानी के स्वागत में न तामझाम, न मंच, न बुके; सुखदेव भगत के दौरे से कितना अलग रहा बीजेपी का अंदाज?
त्वरित खबरें :भूमिका रिपोर्टिंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रदेश प्रभारी के पहले दौरे और उनके स्वागत के तरीके चर्चा का विषय बन गए हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के पहले छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया, वहीं बीजेपी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के रायपुर आगमन पर सादगी देखने को मिली। उनके स्वागत के लिए न ढोल-ताशे बजाए गए और न ही प्रस्तावित बाइक रैली निकाली गई। एयरपोर्ट पर संगठन की ओर से नामित 16 पदाधिकारी और विधायक ही स्वागत के लिए पहुंचे।

सुखदेव भगत के दौरे पर दिखा कांग्रेस नेताओं का उत्साह

कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी और सांसद सुखदेव भगत 27 सितंबर को पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत सहित अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। उनके तीन दिवसीय दौरे में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, जिला अध्यक्षों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य संगठन की स्थिति का आकलन करना और आगामी राजनीतिक गतिविधियों की रणनीति तैयार करना था।

स्मृति ईरानी के स्वागत में सादगी पर जोर

बीजेपी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 25 अक्टूबर को रायपुर पहुंचीं। उनके स्वागत को लेकर पहले बाइक रैली और विभिन्न स्थानों पर स्वागत कार्यक्रमों की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम समय में बाइक रैली स्थगित कर दी गई। एयरपोर्ट पर केवल नामित पदाधिकारी और विधायक पहुंचे। न ढोल-ताशे बजाए गए और न ही मंत्रियों को स्वागत के लिए बुलाया गया।

स्मृति ईरानी के साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी पहुंचे। उनके दौरे में स्वागत समारोह के बजाय संगठनात्मक बैठकों और पार्टी की आगामी रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दो दिन में 12 बैठकों के जरिए संगठन की समीक्षा

स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कुल 12 बैठकों में शामिल हो रहे हैं। इन बैठकों में प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और निगम-मंडल के अध्यक्षों सहित विभिन्न स्तर के नेताओं से चर्चा की जा रही है।

बीजेपी का फोकस संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने, नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मजबूत करने पर है।

दोनों दौरों में क्या रहा अंतर?

दोनों प्रदेश प्रभारियों के पहले दौरे की तुलना करें तो कांग्रेस के स्वागत में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और औपचारिकता प्रमुखता से दिखाई दी, जबकि स्मृति ईरानी के आगमन पर बीजेपी ने सीमित स्वागत और संगठनात्मक बैठकों को प्राथमिकता दी। हालांकि, स्वागत के तरीके में अंतर को सीधे दोनों दलों की राजनीतिक रणनीति का निर्णायक संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

फिलहाल, छत्तीसगढ़ की राजनीति में दोनों दौरों की तुलना इस बात को लेकर चर्चा में है कि प्रदेश प्रभारी के आगमन पर शक्ति प्रदर्शन, स्वागत की भव्यता और संगठनात्मक कामकाज के बीच राजनीतिक दल किसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

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