वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा कारोबारी सत्र में 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,748 गिरकर करीब ₹1.58 लाख पर पहुंच गई, जबकि चांदी भी ₹8,350 सस्ती होकर लगभग ₹2.60 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात को माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से सोना और चांदी दोनों में काफी तेजी देखी जा रही थी। निवेशकों ने वैश्विक तनाव के चलते इन कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश के रूप में पैसा लगाया था। लेकिन अब डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।
कमोडिटी बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर वैश्विक घटनाओं का सीधा असर पड़ता है। हाल ही में मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष और ईरान से जुड़े तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है। तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है, जिससे निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं। इसी कारण सोना और चांदी के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि पिछले दिनों सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ था। कई जगहों पर सोना 10 ग्राम के लिए ₹1.60 लाख से ऊपर और चांदी ₹2.70 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई थी। लेकिन बाजार में मुनाफावसूली और डॉलर के मजबूत होने के बाद कीमतों में गिरावट आनी शुरू हो गई।
सर्राफा बाजार के कारोबारियों के मुताबिक, कीमतों में आई यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। वैश्विक स्तर पर अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है। सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता है और संकट के समय इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों का फैसला और वैश्विक राजनीतिक स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। यदि डॉलर मजबूत रहता है और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं अगर युद्ध या आर्थिक संकट गहराता है, तो कीमतें फिर से तेजी पकड़ सकती हैं।
फिलहाल भारतीय बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में आई गिरावट से ज्वेलरी खरीदने वालों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की स्थिति को देखते हुए ही निवेश का फैसला करें, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण कीमतों में तेजी से बदलाव संभव है।

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