* बुद्ध कहते हैं कि अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो , अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो .
* जिसे जान-बूझकर झूठ बोलने में लज्जा नहीं वह कोई भी पाप कर सकता है , इसलिए तो यह ह्रदय मैं अंकित कर ले कि मैं हंसी मजाक में भी कभी असत्य नहीं बोलूंगा.
* यह लोग भी कैसे हैं सांप्रदायिक मतों में पढ़कर अनेक तरह की दलीलें पेश करते हैं , और सत्य और असत्य दोनों का ही
प्रतिपादन करते हैं , अरे सत्य तो जगत में एक ही है अनेक नहीं.
* सत्य वाणी ही अमृतवाणी है, सत्य वाणी ही सनातन धर्म है ,सत्य संदर्भ और धर्म पर संत जन सदैव दिन रहते हैं.
* सत्यवादी नर्क गामी होते हैं , और वे भी नरक में जाते हैं जो करके नहीं किया कहते हैं.
* जिससे जानबूझकर झूठ बोलने में लज्जा नहीं , उसका साधु पर औंधे घड़े के समान है, साधु ताकि एक बूंद भी उसके ह्रदय घट के अंदर नहीं है.
* जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो, फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी इसे तुम से कोई नहीं छीन सकता.
* हजारों को किले शब्द से अच्छा वह एक शब्द है ,जो शांति लाये.
* संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है, और स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार.

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