डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में बस्तर से 15 आंगादेव लेकर पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने पंचमी भेंट की परंपरा निभाई। विवाद के बाद इस बार भेंट का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस दौरान समाज के लोगों ने आपसी भाईचारे, सौहार्द और मिल-जुलकर परंपराओं का निर्वहन करने का संदेश दिया।
बस्तर से पहुंचे आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां बम्लेश्वरी के दर्शन किए और आंगादेव के माध्यम से अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाया। इस आयोजन को आदिवासी समाज की आस्था और परंपराओं से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचमी भेंट के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया गया।
इससे पहले इस परंपरा को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी, लेकिन इस बार कार्यक्रम के शांतिपूर्वक संपन्न होने से आपसी सहमति और सद्भाव का संदेश सामने आया। समाज के लोगों ने मिल-जुलकर धार्मिक परंपराओं को निभाने और विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने की भावना व्यक्त की।
बस्तर से डोंगरगढ़ तक आंगादेव लेकर पहुंचने की यह परंपरा आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आयोजन के जरिए सामाजिक एकता, पारस्परिक सम्मान और भाईचारे का संदेश दिया गया।

Facebook Conversations