बस्तर। बस्तर के जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के लिए फंदा लगाने वाले शिकारियों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार प्रशिक्षित स्निफर डॉग की तैनाती की गई है। डॉग की मदद से जंगल में लगाए गए फंदों को खोजने के साथ-साथ उनसे जुड़े सुरागों का पीछा कर संभावित शिकारियों तक पहुंचने का अभ्यास भी किया जा रहा है।
वन विभाग ने एंटी-स्नेर वॉक के साथ डॉग स्क्वॉड की मॉक ड्रिल शुरू कर दी है। मॉक ड्रिल के दौरान जंगल में एक निर्धारित स्थान पर फंदा रखा जाता है। इसके बाद प्रशिक्षित डॉग को फंदे की गंध सूंघाकर उससे जुड़े सुरागों का पीछा कराया जाता है। वन अमला डॉग के साथ समन्वय बनाकर संभावित संदिग्ध के स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया का अभ्यास कर रहा है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर उत्तम गुप्ता और डिप्टी डायरेक्टर सुमेध संजय सुरवाडे के मार्गदर्शन में यह कवायद की जा रही है। इसका उद्देश्य वन्यजीव अपराध की रोकथाम के साथ-साथ शिकार से जुड़े मामलों की जांच को और मजबूत करना है।
फंदा लगाने के बाद सुराग छोड़ जाते हैं शिकारी
वन्यजीवों के शिकार के लिए शिकारी अक्सर जंगल में फंदे छिपाकर छोड़ देते हैं और मौके से निकल जाते हैं। घने जंगल, झाड़ियों और बड़े वन क्षेत्र के कारण सामान्य गश्त के दौरान ऐसे फंदों और उनसे जुड़े सुरागों को तलाशना वन अमले के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में प्रशिक्षित स्निफर डॉग की सूंघने और गंध के आधार पर सुरागों का पीछा करने की क्षमता वन विभाग के लिए अहम साबित हो सकती है।
डॉग स्क्वॉड की इस मॉक ड्रिल के जरिए वन अमला वास्तविक वन्यजीव अपराध की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने और फंदा लगाने वाले शिकारियों तक पहुंचने की अपनी क्षमता को मजबूत कर रहा है।

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