मुंगेली के शिक्षक की अनूठी देशभक्ति: दो साल से रोज घर की छत पर फहरा रहे तिरंगा...

त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

मुंगेली। देशभर में तिरंगा अभियान को लेकर राष्ट्रभक्ति का माहौल बना हुआ है। जगह-जगह तिरंगा यात्राएं, ध्वजारोहण और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और अनुशासन की एक प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है। मुंगेली विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला झझपुरीखुर्द में पदस्थ शिक्षक एल.बी. पीताम्बर दास मानिकपुरी पिछले करीब दो वर्षों से प्रतिदिन अपने घर की छत पर तिरंगा फहरा रहे हैं।

नगर पंचायत जरहागांव निवासी शिक्षक पीताम्बर दास की दिनचर्या में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान का विशेष स्थान है। वे हर सुबह करीब 8 बजे अपने घर की छत पर विधिवत ध्वजारोहण करते हैं। इसके बाद शाम को नियमानुसार राष्ट्रध्वज को सम्मानपूर्वक उतारते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वे राष्ट्रध्वज से जुड़े निर्धारित नियमों और मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखते हैं।

बचपन से स्काउटिंग से जुड़ाव

शिक्षक पीताम्बर दास मानिकपुरी का तिरंगे और राष्ट्रसेवा के प्रति लगाव कोई अचानक शुरू हुई पहल नहीं है। वे बचपन से ही स्काउट-गाइड गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। स्काउटिंग के माध्यम से उनके भीतर अनुशासन, सेवा, जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम की भावना मजबूत हुई। यही कारण है कि वे राष्ट्रध्वज को केवल एक कपड़े या प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक मानते हैं।

पीताम्बर दास स्काउट के राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर भी हैं। स्काउटिंग के क्षेत्र में उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। लंबे समय से स्काउटिंग से जुड़े रहने के कारण राष्ट्रध्वज के सम्मान और उससे संबंधित अनुशासन को लेकर उनकी सोच बेहद स्पष्ट है।

दो वर्षों से रोज निभा रहे तिरंगा फहराने की परंपरा

आमतौर पर घरों में राष्ट्रीय पर्वों या विशेष अवसरों पर तिरंगा फहराया जाता है, लेकिन शिक्षक पीताम्बर दास ने इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। वे करीब दो वर्षों से लगातार हर दिन अपने घर की छत पर राष्ट्रध्वज फहरा रहे हैं। मौसम कैसा भी हो और दिन सामान्य हो या कोई विशेष अवसर, उनके लिए तिरंगे का सम्मान रोज की जिम्मेदारी है।

उनका मानना है कि देशभक्ति केवल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या किसी विशेष अभियान के दौरान दिखाई देने वाली भावना नहीं होनी चाहिए। राष्ट्र के प्रति प्रेम और सम्मान को व्यक्ति को अपने दैनिक व्यवहार में भी अपनाना चाहिए। इसी सोच के साथ वे लगातार तिरंगा फहराने की परंपरा निभा रहे हैं।

परिवार भी होता है शामिल

शिक्षक की इस पहल में उनके परिवार के सदस्य भी कई बार शामिल होते हैं। सुबह घर की छत पर तिरंगा फहराने के दौरान परिवार के सदस्य उनके साथ मौजूद रहते हैं। इससे राष्ट्रध्वज के सम्मान की भावना परिवार के अन्य सदस्यों तक भी पहुंच रही है।

एक शिक्षक होने के नाते पीताम्बर दास विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व भी समझाते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से भी अच्छी सीख दी जा सकती है।

तिरंगा अभियान के बीच पहल बनी प्रेरणा

वर्तमान में चल रहे तिरंगा अभियान के बीच शिक्षक पीताम्बर दास मानिकपुरी की यह पहल लोगों के लिए प्रेरणादायी बन रही है। जहां तिरंगा अभियान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का माध्यम है, वहीं शिक्षक की पिछले दो वर्षों से जारी दैनिक पहल यह संदेश देती है कि देशप्रेम किसी एक दिन या अभियान तक सीमित नहीं होना चाहिए।

मुंगेली के जरहागांव निवासी शिक्षक एल.बी. पीताम्बर दास मानिकपुरी ने अपने घर की छत पर रोज तिरंगा फहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया है। स्काउटिंग से उनका पुराना जुड़ाव, राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर की भूमिका और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित होना उनकी इस भावना को और मजबूत करता है। उनकी यह पहल न केवल राष्ट्रध्वज के सम्मान की मिसाल है, बल्कि समाज और खासकर युवा पीढ़ी को देशभक्ति, अनुशासन और जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।