रायगढ़: जिन्दल पर अनुमति से अधिक पेड़ कटाई का आरोप, वन विभाग ने दी थी 13,537 पेड़ों की अनुमति...

त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक स्थित नागरमुड़ा में प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पर्यावरण प्रेमियों और जन चेतना मंच ने आरोप लगाया है कि जिन्दल प्रबंधन ने वन विभाग से मिली अनुमति से कई गुना अधिक पेड़ों की कटाई की है। दावा किया गया है कि करीब 40 हजार से अधिक पेड़ काट दिए गए, जबकि विभाग से 13,537 (कुछ दावों में लगभग 16 हजार) पेड़ों की ही अनुमति मिली थी।

पर्यावरण प्रेमियों ने लगाए गंभीर आरोप

जन चेतना मंच के संयोजक राजेश त्रिपाठी का आरोप है कि नागरमुड़ा क्षेत्र में 50 से 60 हजार के बीच सरई और सागौन जैसे बेशकीमती पेड़ मौजूद थे, लेकिन अनुमति मिलने के बाद मशीनों से बड़े पैमाने पर कटाई कर पूरे इलाके को उजाड़ दिया गया। उनका कहना है कि वन विभाग की अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित और मूल्यवान प्रजातियों के पेड़ों को भी काटा गया, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

सरई के पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

राजेश त्रिपाठी ने कहा कि नागरमुड़ा क्षेत्र में सरई के पेड़ों की संख्या अधिक है, ऐसे में इन पेड़ों की कटाई की अनुमति कैसे दी गई, यह जांच का विषय है। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई है।

वन विभाग ने क्या कहा?

घरघोड़ा वन मंडल के एसडीओ आशुतोष मांडवा ने बताया कि जिन्दल की प्रस्तावित कोयला खदान के लिए विभाग ने 13,537 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि कटाई की जद में साल सहित कई प्रजातियों के छोटे और बड़े पेड़ शामिल हैं।

कटे हुए पेड़ों के परिवहन पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कटाई के बाद लकड़ियों का परिवहन स्वयं जिन्दल प्रबंधन कर रहा है, जबकि सामान्य प्रक्रिया के अनुसार वन विभाग की निगरानी में लकड़ियों का प्रबंधन किया जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कभी हरे-भरे रहे नागरमुड़ा की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है।

जिन्दल का पक्ष नहीं आया सामने

इस मामले में जिन्दल पावर के जनसंपर्क अधिकारी पवन शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार कॉल करने के बावजूद उनका जवाब नहीं मिल सका। ऐसे में इस मामले में कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ पाया है।

कांग्रेस की चुप्पी पर भी उठे सवाल

खबर में यह भी उल्लेख किया गया है कि अडानी समूह की परियोजनाओं में पेड़ कटाई के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन जिन्दल की प्रस्तावित परियोजना में हो रही कटाई को लेकर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई बड़ा विरोध सामने नहीं आया है, जिसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।