संगीत भाषा धर्म व जाति से विमुक्त होता है - हाजरा संगीत क्रोध विवाद और परस्पर वैमनस्यता को समाप्त करती है । विश्व संगीत दिवस पर परिचर्चा का आयोजन सम्पन्न....

त्वरित खबरें निशा विश्वास ब्यूरो प्रमुख

 संगीत भाषा धर्म व जाति से विमुक्त होता है - हाजरा

संगीत क्रोध विवाद और परस्पर वैमनस्यता को समाप्त करती है ।

 विश्व  संगीत दिवस पर परिचर्चा का आयोजन सम्पन्न

                   विश्व संगीत दिवस के अवसर पर चक्रधर कत्थक कल्याण केंद्र राजनांदगांव के सभागृह में परिचर्चा संपन्न हुई उक्त परिचर्चा का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक राजकुमार शर्मा द्वारा शास्त्रीय संगीत पर आधारित माँ सरस्वती की वंदना से प्रारंभ हुआ उक्त अवसर पर संस्था के संचालक डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने इस आयोजन को शहर का प्रथम आयोजन बताते हुए कहा कि योग मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है तो वहीं दूसरी ओर संगीत मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है योग, संगीत और साहित्य मानव जीवन के लिए अतिमहत्वपूर्ण है संगीत साधना अनुशासन का एक अंग है। संगीत मानव जीवन व समाज को अनुशासित रहने की सीख देता है अनुशासित समाज ही देश के विकास को गति देता है । आयकर अधिवक्ता राकेश ठाकुर ने इस अवसर पर फिल्म संगीत पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण फिल्मी गानों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के गाने  शास्त्रीय संगीत पर आधारित होने से ठहराव था। आज कल के गानों में नहीं है जो कुछ समय पश्चात विलुप्त हो जाता हैं । आज भी दशकों पुराने गाने हमारे दिलो दिमाग में रचे बसे हैं और उन गानो को बार-बार सुनने से मस्तिष्क को सुकून मिलता है कुछ गाने गाकर उन्होंने उदाहरण भी दिए ।

डॉ. आनंद वर्गिस सदस्य उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग ने कहा कि संगीत मानव जीवन के सुख-दुख का साथी है भारतीय फिल्म संगीत में बंगाल व दक्षिण भारतीय संगीत का विशेष योगदान रहा है । आज भी पुराने बांग्ला गानों पर आधारित हिंदी फिल्म गानों का निर्माण हो रहा है और उदाहरण भी दिये और कहा कि फिल्म संगीतकार आनंद जी जब राजनांदगांव हाजरा परिवार में आए थे तब उनके साथ बिताए पलों का संस्मरण सुनाते हुए संगीतकार आनंद जी ने जो प्रशंसा की थी वह राजनांदगांव के लिए गौरवपूर्ण है और इस अवसर पर उनके मोबाइल के फोटो स्मृति को भी साझा किया । इस अवसर पर संगीत विशारद् अमलेन्दु हाजरा ने संचालन करते हुए कहा कि संगीत क्रोध, विवाद और परस्पर वैमनस्यता को समाप्त करती है संगीत भाषा धर्म जाति से विमुक्त होता है श्रेष्ठ राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका संगीत की होती है देश की आजादी में राष्ट्रगीत वंदे मातरम ने हमें एक सूत्र में बांधे रखा जिसे हम आज भी संयोजित किए हुए हैं और उन्होंने इस अवसर पर भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान शहनाई वादक से लेकर सरोद वादक अमजद अली खान व उस्ताद जाकिर हुसैन (तबला वादक) के संगीत साधना का श्रेष्ठ उदाहरण दिया और फिल्म संगीतकार आर.डी बर्मन के श्रेष्ठ संगीत संयोजन को भी उदाहरण सहित बताया ।  उन्होंने यह भी कहा कि डीजे संस्कृति ने संगीत को कोलाहल बनाकर कलंकित किया है । सुप्रसिद्ध जस गायक एवं ख्याति प्राप्त लोक कलाकार सुनील बांसोड़ ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा को मूल आधार बताते हुए कहा कि कलाकार अपने सुर ताल की साधना कर मंच पर अनुशासित होकर अपना प्रदर्शन करता है जिससे उसे प्रसिद्धि प्राप्त होती है उन्होंने अपने पुत्र का उदाहरण देते हुए प्रसिद्ध फिल्म पाश्र्व गायक सुरेश वाडेकर के संगीत के प्रति लगाव व अनुशासन को भी बताया पूर्व शासकीय अभिभाषक नारायण कन्नौजे ने संगीत व साहित्य से जुड़े लोगों को अत्यधिक संवेदनशील एवं पारदर्शी होना बताते हुए कहा कि न्यायिक, प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में संगीत से जुड़े लोगो ने अपने आप को स्थापित कर ऊंचाइयां को प्राप्त किया है और लोकप्रिय भी हुए हैं जिनके मूल में संगीत का अनुशासन दिखाई देता है जो संयम व अनुशासन के परिचायक हैं इस अवसर पर डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने रायगढ़ के महाराज चक्रधर को भारत रत्न दिये जाने का प्रस्ताव भी रखा है और लोगो से अपील भी की कार्यक्रम के अंत में संस्कार ठाकुर ने उपस्थित सरस्वती पुत्र प्रबुद्ध जनों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया उक्त जानकारी संस्था की ओर से तुषार सिन्हा द्वारा दी गई