छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रिटायर्ड IAS निरंजन को जमानत:ओवरटाइम घोटाले में अनवर ढेबर ने मांगी बेल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस अधिकारी Niranjan Das को अदालत से जमानत मिल गई है। लंबे समय से जेल में बंद निरंजन दास पर शराब कारोबार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली नेटवर्क में शामिल होने के आरोप हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान उनकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जांच की प्रगति को ध्यान में रखते हुए राहत दी। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर शराब घोटाले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर इस मामले में बड़े अधिकारियों और नेताओं को बचाने का आरोप लगाता रहा है, जबकि जांच एजेंसियों का दावा है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।

इसी मामले से जुड़े ओवरटाइम घोटाले में कारोबारी Anwar Dhebar ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। अनवर ढेबर पर आरोप है कि शराब कारोबार के जरिए करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन और वित्तीय अनियमितताओं में उनकी अहम भूमिका रही। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और जांच एजेंसियों से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि अब तक की जांच में क्या प्रगति हुई और आरोपी के खिलाफ कौन-कौन से ठोस सबूत मौजूद हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मामले की सुनवाई और तेज हो सकती है।

शराब घोटाले को लेकर जांच एजेंसियों का दावा है कि राज्य में शराब की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि सिंडिकेट बनाकर शराब कारोबार से अवैध वसूली की गई और सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाया गया। ईडी और अन्य एजेंसियां लगातार कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं। जांच के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत भी जुटाए गए हैं। इसी आधार पर कई गिरफ्तारियां हुईं और कई लोगों को अदालत से राहत भी मिली।

राजनीतिक रूप से भी यह मामला काफी संवेदनशील बना हुआ है। विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि शराब घोटाला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक है। भाजपा नेताओं ने सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इस बीच अदालतों में चल रही सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले फैसले कई बड़े नामों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं या उन्हें राहत दिला सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर पातीं तो आरोपियों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि वित्तीय लेनदेन और कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेज पुख्ता साबित होते हैं तो कई और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी तीनों स्तर पर राज्य की सबसे चर्चित जांचों में शामिल बना हुआ है।