CBSE का बड़ा फैसला: 9वीं और 10वीं में पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, 50 लाख छात्र होंगे प्रभावित

त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत बड़ा फैसला लेते हुए कक्षा 9वीं और 10वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के तहत छात्रों को अब तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। बोर्ड का यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा। इस फैसले से देशभर के लगभग 50 लाख छात्र प्रभावित होंगे। हालांकि CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं लिया जाएगा, लेकिन छात्रों को इसकी पढ़ाई करना अनिवार्य रहेगा।

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत छात्रों को एक भारतीय भाषा, एक क्षेत्रीय भाषा और एक विदेशी भाषा पढ़ाई जाएगी। बोर्ड ने स्कूलों को यह छूट दी है कि वे छात्रों की पसंद और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तीसरी भाषा का चयन कर सकते हैं। सभी स्कूलों को 30 जून तक यह जानकारी CBSE को देनी होगी कि वे कौन-सी भाषा को थर्ड लैंग्वेज के रूप में लागू कर रहे हैं।

CBSE ने बताया कि यह निर्णय हाल ही में जारी किए गए NCERT के 2026-27 सिलेबस को ध्यान में रखकर लिया गया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन स्कूलों को 1 जुलाई से तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। जब तक नई किताबें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक कक्षा 9वीं के छात्र 6वीं कक्षा की थर्ड लैंग्वेज की किताबों से पढ़ाई करेंगे। इसके साथ ही स्कूलों को स्थानीय साहित्य, कविताएं, कहानियां और क्षेत्रीय सामग्री भी उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि छात्रों में भाषा और संस्कृति की बेहतर समझ विकसित हो सके।

बोर्ड ने माना है कि कुछ स्कूलों को भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करने में दिक्कत हो सकती है। इसे देखते हुए CBSE ने स्कूलों को इंटर-स्कूल रिसोर्सेज, हाइब्रिड टीचिंग सपोर्ट और रिटायर्ड भाषा शिक्षकों की मदद लेने की अनुमति दी है। साथ ही योग्य पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों की नियुक्ति करने का विकल्प भी दिया गया है।

CBSE और NCERT तीसरी भाषा के लिए 19 भारतीय भाषाओं में किताबें तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगु समेत कई अन्य भाषाएं शामिल हैं। इससे छात्रों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन का अवसर मिलेगा।

इससे पहले CBSE 9 अप्रैल 2026 को कक्षा 6वीं में भी थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू कर चुका है। महाराष्ट्र इस नीति को लागू करने वाला पहला राज्य बना था, जहां पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए हिंदी पढ़ना अनिवार्य किया गया है।

नई शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद शिक्षा नीति में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाना, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देना और उन्हें नई स्किल्स से जोड़ना है। केंद्र सरकार ने इस नीति को 2030 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा है।