भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ में बढ़ते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, जिससे गांवों और शहरों में पेयजल की समस्या गहराने लगी है। इसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राहत अभियान शुरू करते हुए सभी जिला प्रशासन, नगर निगमों और पंचायतों को तत्काल प्रभाव से जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि लोगों को पीने के पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़े, इसके लिए खराब हैंडपंप और बोरवेल को एक सप्ताह के भीतर सुधारना होगा। साथ ही जहां पानी की ज्यादा समस्या है, वहां टैंकरों के जरिए नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
राज्य स्तर पर जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग की संयुक्त मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर दिन जल संकट वाले इलाकों की रिपोर्ट तैयार करें और समस्या का त्वरित समाधान करें। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब पड़े हैंडपंपों की सूची तैयार की जा रही है और तकनीकी टीमों को मरम्मत कार्य में लगाया गया है। कई जगहों पर नए बोरवेल खोदने और पुराने जल स्रोतों को फिर से चालू करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
सरकार ने गर्मी के मौसम में राहगीरों और आम लोगों को राहत देने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ खोलने का भी निर्णय लिया है। बस स्टैंड, बाजार, अस्पताल, स्कूल और प्रमुख चौक-चौराहों पर ठंडे पेयजल की व्यवस्था की जाएगी ताकि लोगों को गर्मी से राहत मिल सके। नगर निगमों और पंचायतों को यह सुनिश्चित करने कहा गया है कि पानी की गुणवत्ता साफ और सुरक्षित रहे। इसके अलावा जल संरक्षण को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, ताकि लोग पानी की बर्बादी रोक सकें।
प्रदेश में चल रही अधूरी जल योजनाओं को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित जल योजनाओं को अगले 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन विस्तार या पानी टंकी निर्माण का कार्य अधूरा है, वहां तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं ताकि किसी भी जिले में पेयजल संकट गंभीर रूप न ले सके।
गर्मी के इस कठिन दौर में सरकार के इस राहत अभियान से लोगों को बड़ी उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में जहां महिलाएं और बच्चे दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर होते हैं, वहां इन कदमों से राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन तय समय सीमा में इन योजनाओं को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतार पाता है।