विधानसभा में गूंजा धान उठाव का मुद्दा: बघेल बोले– बस्तर में 2209 आंगनबाड़ी बिना भवन, शौचालय तक नहीं

त्वरित ख़बरें : ज़ाफ़रान खान रिपोर्टिंग

रायपुर  छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धान उठाव और आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। सदन में विधायक बघेल ने धान का उठाव समय पर नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर धान खरीदी के बाद भी किसानों का धान गोदामों से नहीं उठाया जा रहा है, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी केंद्रों में लंबे समय तक धान पड़े रहने से खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में सरकार को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है। विधायक बघेल ने सदन में बस्तर संभाग की आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि बस्तर में कुल 2209 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जो बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर आंगनबाड़ी केंद्र किराए के कमरों, सामुदायिक भवनों या अस्थायी स्थानों पर चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए चलाए जा रहे इन केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों और महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बघेल ने सरकार से मांग की कि बस्तर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जल्द से जल्द भवन निर्माण की योजना बनाई जाए, ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण में पोषण और शिक्षा से जुड़ी सेवाएं मिल सकें। सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का अहम हिस्सा हैं। अगर ये केंद्र ही बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहेंगे तो योजनाओं का सही लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कार्रवाई करने और जल्द स्थिति सुधारने की मांग की। विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद सरकार की ओर से भी स्थिति की समीक्षा करने और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। धान उठाव और आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति को लेकर सदन में हुई चर्चा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और बस्तर के आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं।