1 रुपये का नोट अभी भी बाजार में क्यों चलता है? जानिए इसका हैरान करने वाला कारण!

त्वरित ख़बरें - दीपमाला शेट्टी रिपोर्टिंग

1 रुपये का नोट आज भी क्यों चलता है? जानिए इसके पीछे का असली कारण भारत में भले ही डिजिटल पेमेंट्स और बड़े नोटों का चलन बढ़ गया हो, लेकिन 1 रुपये का नोट आज भी वैध मुद्रा बना हुआ है। आम लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब 1 रुपये का सिक्का भी मौजूद है, तो फिर नोट क्यों चलाया जा रहा है? चलिए इस दिलचस्प विषय को विस्तार से समझते हैं।

1 रुपये का नोट कौन जारी करता है?

आम धारणा के विपरीत, भारत में 1 रुपये का नोट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) नहीं, बल्कि भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है।
यह एकमात्र नोट है जिसे वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) जारी करता है, जबकि अन्य सभी नोट RBI द्वारा जारी किए जाते हैं।

इतिहास से जुड़ी खास बातें

  • भारत में 1 रुपये का नोट पहली बार 30 नवम्बर 1917 को जारी किया गया था।

  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय इस नोट का चलन बहुत बढ़ा।

  • 1994 में इसकी छपाई बंद कर दी गई थी, लेकिन फिर 2015 में इसे दोबारा पेश किया गया।

🧑‍⚖️ कानूनन मान्यता क्यों है?

भारतीय मुद्रा अधिनियम 1934 और अन्य मौद्रिक नियमों के अनुसार, 1 रुपये का नोट एक लीगल टेंडर (वैध मुद्रा) है।
जब तक सरकार इसकी वैधता को रद्द नहीं करती, तब तक यह नोट पूरी तरह मान्य रहेगा और लेनदेन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

1 रुपये के नोट की खासियत

  • इस पर RBI गवर्नर के बजाय वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

  • इसकी कानूनी मान्यता सिक्कों के समान मानी जाती है।

  • कम मूल्य के नोटों की मांग कुछ विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है, जैसे सरकारी गिनती, औद्योगिक भुगतान आदि।

विशेषज्ञ सलाह:

अगर आपके पास पुराने 1 रुपये के नोट हैं, तो उन्हें सुरक्षित रखें। कुछ पुराने नोटों की कलेक्टर मार्केट में भारी कीमत मिल सकती है।
साथ ही, सामान्य लेनदेन में भी आप 1 रुपये का नोट बिना किसी हिचकिचाहट के इस्तेमाल कर सकते हैं।