रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि महिलाओं को सच में सम्मान देना है तो पहले “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा केवल महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसे चुनावी हथियार बनाकर पेश करना उचित नहीं है।
इधर छत्तीसगढ़ सरकार महिला आरक्षण बिल को लेकर विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस सत्र में महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी और आरक्षण के मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार इसे महिलाओं के हित में बड़ा कदम बताकर जनता के बीच संदेश देना चाहती है। वहीं विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है और इसे केवल राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार विपक्ष के हालिया बयानों और विरोध प्रदर्शन को लेकर निंदा प्रस्ताव भी ला सकती है। इससे विधानसभा का आगामी सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर गंभीर नहीं है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
कुल मिलाकर महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल सामाजिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में विशेष सत्र और नेताओं के बयानों से छत्तीसगढ़ की राजनीति और गर्माने की संभावना है। जनता की नजर अब इस बात पर रहेगी कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कौन वास्तव में ठोस कदम उठाता है और कौन केवल बयानबाजी करता है।