सीईओ से की शिकायत हटाने की मांग रखी गई
ग्राम पंचायत सचिव के मनमाने तरीके से काम करने के कारण पंचो सहित ग्रामीणजनों द्वारा शिकायत करने जनपद कार्यालय पहुंचे। सचिव के मनमाने रवैये से परेशान ग्रामीणों ने बताया कि सचिव के बहुत कम समय के लिए कभी-कभी ग्राम पंचायत में आते हैं। कोई काम लेकर जाने पर वह आनाकानी करने के साथ ही हितग्राहियों को बार-बार एक ही काम के लिए चक्कर कटवाते हैं।
विकासखंड धमधा के ग्राम पंचायत मूढ़पार के कई बुजुर्ग पेंशन के हितग्राही तीन साल से वृद्धा पेंशन में नाम जुड़वाने के लिए भटक रहे हैं। यहां पंचों से लेकर बुजुर्ग तक सचिव के कार्यप्रणाली से परेशान हैं। आधा दर्जन से अधिक पंच एवं ग्रामीण जनपद कार्यालय पहुंचे और सचिव के खिलाफ शिकायत करते हुए बताया कि पंचायत सचिव बीते कई महीनों से पंचों को दी जाने वाली मानदेय राशि नहीं दी है।
ग्राम पंचायत मूढ़पार धमधा के पंचों ने ग्रामीणों ने जनपद सीईओ को दिया आवेदन
अधूरे पड़े हुए है गाँव में विकास कार्य
ग्रामीणों एवं पंचों ने बताया कि ग्राम पंचायत मूढ़पार विकासखंड धमधा में गाँव के विकास के लिए लागू हुए अनके कार्य अधुरा पड़ा हुआ है जैसे नलजल की समस्या है 11 महीने से काम अधूरा पड़ा हुआ है | \
डीएससी चालू नहीं हो रहा है जिसके लिए कोई कोशिश नही की जा रही है |
दो साल पहले आंगनबाड़ी का काम करवाया गया था 2 साल से वह भी पेंडिंग पड़ा हुआ है |
पंचायत में राशन कार्ड का काम भी अधूरा है |
ग्राम पंचायत सचिव को हटाने की ग्रामीणों ने की मांग
ग्राम पंचायत मूढ़पार विकासखंड धमधा पंचायत सचिव के कार्यप्रणाली से परेशान ग्रामीणों ने सीईओ को सौंपे शिकायती आवेदन में मांग किया है कि प्रशासन के द्वारा पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया तो आंदोलन करेंगे। पंचायत सचिव के तानाशाह रवैये के कारण पंचायत में होने वाले विकास कार्य भी रुके हुए हैं। इसके कारण ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सचिव के बर्ताव से सरपंच हलाकान
मिली जानकारी के अनुसार जब हमने सचिव के कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी निकली तो पाया कि उसके रवैये को देखते हुए पंचायत जाना भी सरपंच को अच्छा नही लगता गाँव के छोटे बड़े कार्यो का भुगतान सरपंच अपने जेब से करता है | पंचायत के कार्यो के लिए सरपंच ने सचिव से कहा भी की आप लापरवाही कर रहे है जिसपर सचिव जो है सरपंच की बातो को ध्यान नही देता ग्रामीणों ने बताया कि सचिव के एक हस्ताक्षर के लिए महीनों का चक्कर काटना पड़ता है।