*"जो भारत को धमकाए, उसका माल घर न आए!"*
*(विदेशी दबाव का जवाब, स्वदेशी से प्रतिकार)*
*"दादागिरी नहीं चलेगी – अब हर घर में सिर्फ स्वदेशी ही चलेगी!*"
*(अमेरिकी, चीनी, तुर्की – तीनों को आर्थिक पटकनी)*
*"देश के दुश्मन के ब्रांड नहीं – अब चलेगा सिर्फ हिंदुस्तानी नाम!*"
*(टेस्ला हो या कोका-कोला – अब नहीं चलेगा विदेशी झोला)*
*विदेशी दादागिरी के विरुद्ध स्वदेशी का संकल्प – टेस्ला सहित अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करें*
स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत सह समन्वयक श्री संजय चौबे ने अमेरिकी कंपनी टेस्ला सहित सभी विदेशी उपभोक्ता उत्पादों के बहिष्कार का जोरदार आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बार-बार भारत को धमकाकर अपनी वैश्विक दादागिरी को आगे बढ़ा रहा है, जो देश की आर्थिक संप्रभुता और स्वाभिमान पर सीधा हमला है।
संजय चौबे ने स्पष्ट किया
*"जिस प्रकार अमेरिका भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, व्यापार समझौतों और रणनीतिक निर्णयों में बाधा डाल रहा है, वह एक आर्थिक युद्ध का संकेत है। और इस युद्ध में भारत की सबसे बड़ी ताकत है – स्वदेशी और आत्मनिर्भरता।"*
*FMCG उत्पादों की पहचान और बहिष्कार की योजना:*
उन्होंने यह भी बताया कि अब समय आ गया है कि हम अमेरिका और अन्य देशों के FMCG उत्पादों को चिन्हित करें और व्यवस्थित रूप से उनके विकल्प के रूप में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें।
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, स्नैक्स, ड्रिंक, ब्यूटी प्रोडक्ट्स से लेकर मोबाइल ऐप्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक – सभी विदेशी विकल्पों को त्यागकर ‘स्वदेशी ब्रांडों’ को अपनाना ही इस युद्ध का सबसे कारगर हथियार है।
*टेस्ला का विरोध क्यों?*
टेस्ला जैसी कंपनियाँ भारतीय बाजार को केवल उपभोग का माध्यम मानती हैं।
यहाँ निर्माण नहीं, केवल मुनाफा कमाना उनका उद्देश्य है। ऐसे में उन्हें बढ़ावा देना हमारी अर्थव्यवस्था को hollow करता है, जबकि Make in India और Local Manufacturing को नुकसान पहुँचाता है।
*प्रण लें – विदेशी नहीं, स्वदेशी अपनाएँ*
"हम सभी स्वदेशी विचारधारा के समर्थक लोग आज संकल्प लें कि –
* *हम अमेरिकी, चीनी और तुर्की जैसे देशों के आक्रामक व्यापार मॉडल का बहिष्कार करेंगे।*
* हम अपने दैनिक जीवन में अधिकतम स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे।
* हम युवाओं, व्यापारियों, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को स्थानीय निर्माण के लिए प्रेरित करेंगे।"
*संजय चौबे ने अंत में कहा*
*“स्वदेशी ही ब्रह्मास्त्र है, जिससे हम विदेशी दादागिरी को न केवल जवाब दे सकते हैं, बल्कि भारत को आर्थिक महाशक्ति भी बना सकते हैं। आइए, अमेरिकी उत्पादों के बहिष्कार से शुरूआत करें – और भारत के हित में काम करें।”*
प्रेषक:
संजय चौबे
प्रांत सह समन्वयक
स्वावलंबी भारत अभियान, छत्तीसगढ़

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