ट्रम्प-जिनपिंग की बैठक 2 घंटे चली:चीनी राष्ट्रपति बोले- अमेरिका और चीन पार्टनर बनें, प्रतिद्वंद्वी नहीं; ट्रम्प ने कहा- आपसे दोस्ती सम्मान की बात
त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

Donald Trump और Xi Jinping के बीच हुई अहम बैठक करीब दो घंटे तक चली, जिसमें दोनों देशों के रिश्तों, व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों में स्थिरता और सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में कहा कि अमेरिका और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल दोनों राष्ट्रों के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए भी बेहद जरूरी है। जिनपिंग ने यह भी कहा कि टकराव की राजनीति किसी के हित में नहीं है और दुनिया को प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग की जरूरत है। उनके इस बयान को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बैठक के दौरान शी जिनपिंग के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उनसे दोस्ती होना सम्मान की बात है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और चीन के संबंध दुनिया की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देश कई मुद्दों पर मिलकर काम कर सकते हैं। ट्रम्प के इस बयान को दोनों देशों के रिश्तों में नरमी और सकारात्मक संवाद की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

बैठक के दौरान व्यापारिक तनाव, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, वैश्विक बाजार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार के तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात से अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद दुनियाभर के राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञ इसकी अहमियत पर चर्चा कर रहे हैं। वैश्विक बाजारों में भी इस मुलाकात के सकारात्मक संकेत देखने को मिले। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में नई दिशा देखने को मिल सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ेगा।

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