तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान बनाने प्राचार्यों का हुआ प्रशिक्षण
जगदलपुर, 17 नवंबर: जिले की शिक्षण संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्राचार्यों व नोडल अधिकारीयों को आज एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया जिसमें बस्तर जिले के 178 शासकीय शालाओं के 200 से अधिक शिक्षक उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हुए इस प्रशिक्षण में स्कूली बच्चों को नशे से मुक्त रखने की जानकारी प्रदान की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्कूल के 100 गज की दूरी में किसी भी तंबाकू उत्पाद की बिक्री व सेवन पर पूर्णतः नियंत्रण लगाना है । कार्यशाला में तंबाकू मुक्त शैक्षिक संस्थान (टोबैको फ्री एजुकेशनल इंस्टीट्यूट) के लिए जारी किये गए दिशानिर्देशों की विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए, स्व-मूल्यांकन स्कोरकार्ड के बारे में भी बताया गया।
तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी सह जिला सीएमएचओ डॉ.डी राजन ने बताया: " जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू व तम्बाकू उत्पाद से मुक्त रखने हेतु नोडल अधिकारियों का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय के एक छात्र और छात्रा कोटपा (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम), 2003 मॉनिटर नियुक्त होंगे जो विद्यालय परिसर में कोटपा नियमों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे क्योंकि कुछ शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की दुकान लगाई जाती हैं जिससे आसानी से विद्यार्थियों तक इसकी पहुंच होने लगती है।‘’
उन्होंने बताया यदि किसी शिक्षण संस्थान के 100 मीटर के दायरे में तम्बाकू का वितरण या सेवन करते हुए कोई व्यक्ति पाया गया तो उन पर स्कूल के नोडल अधिकारी द्वारा चालानी कार्रवाई की जा सकेगी। अगर तम्बाकू उत्पाद का कोई व्यक्ति सेवन करता है और वह उसे छोड़ना चाहता है तो इसके लिए जिला चिकित्सालय में चलाए जा रहे स्पर्श क्लीनिक में चिकित्सकों से परामर्श ले सकते है
तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के मनोवैज्ञानिक सलाहकार उमाशंकर साहू ने तंबाकू के उपयोग से होने वाले रोग एवं उनके लक्षणों के बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया सभी प्रकार के कैंसरों में तंबाकू के सेवन से जुड़े कैंसरों का हिस्सा सर्वाधिक है। मुँह का कैंसर तंबाकू के प्रयोग से होते हैं। तंबाकू सेवन पर रोक लगाने एवं साथ ही तंबाकू से होने वाले विभिन्न प्रकार के कैंसर के बारे में वृहत पैमाने पर जन-जागरूकता फैलाने की जरुरत है। तंबाकू का दुष्प्रभाव सबसे अधिक स्कूली बच्चों एवं युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया डब्ल्यू.एच.ओ. के अनुसार तम्बाकू से बने उत्पादों में 4000 से अधिक प्रकार के हानिकारक रसायन पाए जाते है जिसमें से निकोटिन शरीर के लिये अत्यधिक घातक होते है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एन.टी.पी.सी. के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी डॉ.कमलेश जैन लाइव कॉन्फ्रेंस में जुड़े रहे और उनके द्वारा इस अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने में सहयोग की अपील की गयी। इसके अतिरिक्त , जिला सहायक नोडल अधिकारी राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम डॉ.महेश मिश्रा, यूनिसेफ / सी 3 के जिला समन्वयक दुर्गा शंकर नायक, आर.एस.एम.ए. से जय नारायण पाणिग्राही, कोटपा एक्ट नोडल अधिकारी सुरेश इंद्र पाणिग्राही , और समस्त विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण को सफल बनाने में तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के मनोवैज्ञानिक सलाहकार उमाशंकर साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

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