सभी सरकारी कर्मचारियों के छुट्टी लेने पर रोक|
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 मुख्य सचिव ने छुट्टियों और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स पर लगाई रोक, बजट लैप्स का डर, तेजी से कराया जा रहा काम

वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में सरकारी कामकाज को तेजी से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश जारी करते हुए सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार को आशंका है कि यदि समय रहते विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं का काम पूरा नहीं हुआ तो बड़ी मात्रा में बजट लैप्स हो सकता है। इसी कारण सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी क्षमता के साथ काम करते हुए वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले लंबित कार्यों को पूरा करें।

*बजट लैप्स से बचने के लिए लिया गया फैसला

दरअसल, हर साल मार्च के आखिरी दिनों में सरकारी विभागों में काम का दबाव बढ़ जाता है। कई योजनाओं के लिए जारी किए गए बजट को निर्धारित समय सीमा के भीतर खर्च करना जरूरी होता है। यदि विभाग समय पर बजट का उपयोग नहीं कर पाते तो वह राशि वापस चली जाती है, जिसे बजट लैप्स कहा जाता है।

इसी स्थिति से बचने के लिए मुख्य सचिव ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों और कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने विभागों के लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, किसी भी कर्मचारी को छुट्टी न दी जाए।

सरकार का मानना है कि इस समय सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी है, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से किया जा सके।

*छुट्टियों और ट्रेनिंग कार्यक्रमों पर भी रोक

मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि फिलहाल सभी प्रकार की छुट्टियों पर रोक रहेगी। इसमें आकस्मिक अवकाश (CL), अर्जित अवकाश (EL) और अन्य सामान्य छुट्टियां भी शामिल हैं। केवल आपातकालीन या बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही छुट्टी की अनुमति दी जा सकेगी।

इसके अलावा विभागों में चल रहे ट्रेनिंग कार्यक्रमों, वर्कशॉप और सेमिनारों को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन कार्यक्रमों में कर्मचारियों की भागीदारी के कारण नियमित काम प्रभावित होता है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति धीमी पड़ जाती है।

*विकास कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर

राज्य सरकार का फोकस इस समय विकास कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर है। सड़क, भवन, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई परियोजनाएं ऐसी हैं जिनके लिए बजट आवंटित किया गया है और जिनका काम अंतिम चरण में है।

सरकार चाहती है कि इन सभी परियोजनाओं को 31 मार्च से पहले पूरा कर लिया जाए या कम से कम इतना काम कर लिया जाए कि बजट का उपयोग हो सके। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को रोजाना प्रगति रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं।

*जिलों में भी प्रशासन सक्रिय

मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी जिलों में प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टरों ने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

कई जिलों में निर्माण कार्यों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि ठेकेदारों के साथ समन्वय बनाकर काम की गति तेज करें, ताकि समय पर काम पूरा हो सके।

*योजनाओं के भुगतान में तेजी

सरकारी योजनाओं के तहत किए गए कार्यों के भुगतान में भी तेजी लाई जा रही है। कई विभागों में ठेकेदारों और सप्लायरों के बिल लंबित थे, जिन्हें अब तेजी से क्लियर करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि भुगतान में देरी होती है तो बजट खर्च नहीं हो पाता और वह राशि वापस चली जाती है। इसलिए वित्त विभाग के साथ समन्वय बनाकर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।

*कर्मचारियों पर बढ़ा काम का दबाव

छुट्टियों पर रोक और काम की रफ्तार बढ़ने से कर्मचारियों पर काम का दबाव भी बढ़ गया है। कई विभागों में कर्मचारियों को देर शाम तक काम करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह स्थिति केवल कुछ दिनों के लिए है और वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।

कर्मचारी संगठनों का भी कहना है कि यदि योजनाओं को समय पर पूरा करना है तो सभी कर्मचारियों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन कर्मचारियों ने इस अवधि में अतिरिक्त काम किया है, उन्हें भविष्य में समुचित राहत दी जाए।

*विभागों को दी गई सख्त चेतावनी

मुख्य सचिव ने विभागों को यह भी चेतावनी दी है कि यदि बजट का उपयोग नहीं हो पाया और राशि लैप्स हो गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसलिए सभी विभागों को गंभीरता के साथ काम करने के लिए कहा गया है।

साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

*प्रशासन की नजर प्रगति रिपोर्ट पर

राज्य स्तर पर भी सभी विभागों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सचिवालय में नियमित रूप से समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें विभागीय सचिवों से योजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी ली जा रही है।

जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए जा रहे हैं कि वे मैदान में जाकर काम की निगरानी करें और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान करें।

*मार्च के आखिरी दिनों में बढ़ता है काम

विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल मार्च के महीने में सरकारी कामकाज की गति अचानक बढ़ जाती है। इसकी मुख्य वजह यही होती है कि विभागों को अपने बजट का उपयोग करना होता है।

हालांकि कई बार इस वजह से जल्दबाजी में काम होने की भी शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि काम की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाए।

*आगे भी जारी रह सकती है सख्ती

सूत्रों के मुताबिक, यदि अगले कुछ दिनों में काम की रफ्तार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचती है तो सरकार और भी सख्त कदम उठा सकती है। विभागों को अतिरिक्त मॉनिटरिंग और फील्ड विजिट बढ़ाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

फिलहाल सरकार का पूरा फोकस यही है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले सभी योजनाओं का बजट सही तरीके से खर्च हो और विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें।

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