राइट टू रिपेयर कानून लागू होते ही विदेशी कंपनियों को भारत में देना होगा रिपेयर प्रशिक्षण — करोड़ों युवाओं के लिए खुलेगा रोज़गार का स्वर्णिम द्वार....
त्वरित खबरें राहुल ओझा ब्यूरो प्रमुख रिर्पोटिंग

राइट टू रिपेयर कानून लागू होते ही विदेशी कंपनियों को भारत में देना होगा रिपेयर प्रशिक्षण — करोड़ों युवाओं के लिए खुलेगा रोज़गार का स्वर्णिम द्वार....

*PSU और बड़े औद्योगिक समूह जब खरीद में जोड़ेंगे रिपेयर का अधिकार, तब बनेगा आत्मनिर्भर भारत का मजबूत औद्योगिक आधार।*

*हर उपभोक्ता को मिले अधिकार — अपनी चीज़ की मरम्मत करना अब कोई गुनाह नहीं।*

*जो खरीदा है, उस पर पूरा हक़ भी हो — यही है आत्मनिर्भर भारत की नींव। राइट टू रिपेयर से टिकाऊ वस्तुएँ, कम कचरा — पर्यावरण संरक्षण में बढ़ेगा भारत।*

*मरम्मत का अधिकार = सशक्त उपभोक्ता + प्रशिक्षित युवा + आत्मनिर्भर भारत*

*राइट टू रिपेयर” कानून को शीघ्र लागू कर भारत को बनाए आत्मनिर्भर – युवाओं को मिलेगा रोज़गार, उपभोक्ता को मिलेगा अधिकार*

स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत सह समन्वयक संजय चौबे ने बताया कि देश में उपभोक्ता अधिकारों को सशक्त बनाने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से "राइट टू रिपेयर कानून" को शीघ्र लागू किए जाने की मांग अब तेज़ होती जा रही है। यह कानून न केवल आम नागरिक को अपने उत्पादों की मरम्मत की स्वतंत्रता देगा, बल्कि तकनीकी प्रशिक्षण और रिपेयर कौशल के माध्यम से करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगा।

इसी कड़ी में संजय चौबे ने कहा कि आज उपभोक्ताओं को अपनी ही खरीदी हुई वस्तु की मरम्मत का अधिकार नहीं मिल पाता। विदेशी कंपनियाँ न केवल मरम्मत के तरीके छुपाती हैं, बल्कि उपभोक्ता को सिर्फ अधिक कीमत देकर नया उत्पाद लेने के लिए मजबूर करती हैं। यह उपभोक्ता शोषण के साथ-साथ स्थायी विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।

अब समय आ गया है कि भारत सरकार “राइट टू रिपेयर” कानून को शीघ्र पारित करे और इसे सभी सरकारी उपक्रमों (PSUs), मंत्रालयों और निजी औद्योगिक घरानों की खरीद नीति में शामिल करना अनिवार्य करे।

आगे संजय चौबे आम आदमी को कैसे होगा लाभ बताते हुए कहा कि राइट टू रिपेयर कानून का सबसे बड़ा लाभ देश के आम उपभोक्ताओं को होगा, जो रोजमर्रा की ज़िंदगी में इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, वाहन, कृषि उपकरण आदि का उपयोग करते हैं। 

इसी तारतम्य में संजय चौबे ने इस कानून से उपभोक्ताओं को  क्या क्या फायदे होंगे बताया।

 1. *मरम्मत की आज़ादी और कम खर्च*

उदाहरण: अगर आपके मोबाइल की स्क्रीन टूट गई है, तो आज आपको कंपनी के सर्विस सेंटर पर ही ऊँचे दाम देकर रिपेयर कराना पड़ता है।

राइट टू रिपेयर कानून लागू होने पर आप स्थानीय दुकान पर या खुद भी स्क्रीन बदल सकेंगे — और वह भी कम खर्च में।

2. *खरीदी गई वस्तु पर पूरा अधिकार*

उदाहरण: पुराने फोन में हम बैटरी आसानी से निकाल सकते थे, लेकिन आज की कंपनियाँ इसे अंदर फिक्स कर देती हैं ताकि आप खुद न बदल सकें।

इस कानून से उपभोक्ता को अधिकार होगा कि वह अपनी वस्तु को जैसे चाहे उपयोग करे या सुधार कराए।

3. *स्थानीय दुकानों और तकनीशियनों को मिलेगा काम*

उदाहरण: मोबाइल रिपेयर, पानी के फिल्टर, इस्तरी, पंखा, फ्रिज जैसे उपकरणों की मरम्मत अब सिर्फ कंपनी पर निर्भर नहीं रहेगी।

इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे दुकानदारों को काम मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी।

4. *हर वस्तु को फेंकने की बजाय मरम्मत कर फिर से उपयोग करना आसान*

उदाहरण: यदि आपकी इस्तरी का वायर जल गया, तो अभी नया खरीदना पड़ता है क्योंकि खोलना मुश्किल है।

राइट टू रिपेयर लागू होने पर आप खुद या कोई स्थानीय व्यक्ति उसे खोलकर वायर बदल सकता है।

5. *भावनात्मक जुड़ाव वाली वस्तुएँ भी बच सकेंगी*

उदाहरण: कुछ लोग अपनी पुरानी घड़ी, म्यूज़िक प्लेयर, साइकल या रेडियो से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं।

मरम्मत का अधिकार उन्हें इन प्रिय वस्तुओं को फिर से जीवंत करने का अवसर देगा।

 6. *पर्यावरण संरक्षण में योगदान*

हर बार नया उत्पाद खरीदने से ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरा) बढ़ता है।

मरम्मत से यह कम होगा और हर नागरिक पर्यावरण सुरक्षा में भागीदार बन सकेगा।

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