02 मार्च 2023
राजनांदगांव। कलेक्टर डोमन सिंह के निर्देशन में ग्रामीण औद्योगिक पार्क रीपा अंतर्गत डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम अमलीडीह गौठान में एक दिवसीय रोजगारोमुखी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। एक्सटेंशन रिफॉम्र्स आत्मा योजनांतर्गत आयोजित प्रशिक्षण में कृषक अभिरूचि समूह जय माँ गायत्री महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को पलास फूल से हर्बल गुलाल, सीताफल से आईसक्रीम, अंबाड़ी एवं बेल से शर्बत बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में प्रोजेक्ट डायरेक्टर आत्मा सह उप संचालक कृषि नागेश्वर लाल पाण्डे ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। विभाग द्वारा कृषकों के पास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर अधिक आय अर्जित करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। सीताफल से आईसक्रीम, अंबाड़ी बेल से शर्बत बनाकर रसायन युक्त कार्बोनेटेड सॉफ्टड्रिंक का उपयोग कम करने की आवश्यकता है। स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। कृषकों को विभिन्न योजनाओं से वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। खेती-बाड़ी, वन में उपलब्ध फलों के उपयोग से महिला कृषकों को गृहस्थी कार्य के साथ इस प्रकार गतिविधियों से आर्थिक दृष्टिकोण से मजबूत बरेंगी। उन्होंने जल ग्रहण क्षेत्र की गतिविधियों के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, भूमि एवं जल संरक्षण के दिन प्रतिदिन आवश्यकता बढ़ती जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों एवं जैव विविधता का संरक्षण कर किसानों को आधुनिक कृषि के साथ उद्यानिकी, पशु पालन, मत्स्य पालन से संबंधित आजीविका मूलक गतिविधियों से जोडऩा चाहिए।
सहायक संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने खाद्य प्रौद्योगिकी की नवीन श्रृंखला में सीताफल से आईसक्रीम, अंबाड़ी एवं बेल से शर्बत, पलास फूल से हर्बल गुलाल तैयार करने एवं विक्रय करने के विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजनान्तर्गत राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी एवं खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के विभिन्न गौठानों की स्वसहायता समूह की महिला कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया है। डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर एक्सटेंशन रिफॉम्र्स आत्मा राजू साहू ने कहा कि योजना अंतर्गत कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि वानिकी के उत्पादन का प्रसंस्करण, मूल्यप्रवर्धन, विपणन की श्रृंखला में बेल एवं अम्बाड़ी का शर्बत, सीताफल की आईसक्रीम तैयार करने के प्रशिक्षण से क्षेत्र के कृषकों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध जैव विविधता में जिन फसलों का कृषकों को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके पोषक मूल्य, औषधीय उपयोग एवं प्रसंस्कृत उत्पादों की विपणन की संभावनाओं की जानकारी दी। एक्सटेंशन रिफॉम्र्स आत्मा योजना के तहत वनांचल कृषक अभिरूचि समूह ग्राम पेटेचुवां (कर्रेझर) गुरूर जिला बालोद की सफल उद्यमी श्रीमती छवि राठी ने सौद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी देकर महिला कृषकों को प्रशिक्षित किया।
उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सीताफल औषधीय गुणों से भरपूर है। जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्रीशियम, पोटेशियम, राइबोफ्लेविंग जैसे पोषक तत्व मौजूद हैं। बेल अत्यंत गुणकारी औषधीय फल है। जिसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन्स, गोंद, पेक्टीन, रिड्यूसिंग सुगर, शर्करा, मार्मेलोसीन, कामेरिन इम्बेलिफिरोन एवं अल्प मात्रा में टेनिन होते हंै। यह पित्तहर, ज्वर, कफ की बीमारी में उपयोगी है। इसका उपयोग डायरिया, डिसेन्ट्री, डायबिटीज, कर्णरोग, कामला, ज्वाइंडिस, पाइल्स, शोथ वमन, टाईफाईड, क्रोनिक कन्स्टीपेशन, स्कर्वी टाइफाइड, डिस्पेटिसया में होता है। अमारी के भोज्य पदार्थ में एंटीआक्सीडेंट, ब्लड कन्सेस्टेंसी को कम करना, कफ में राहत, लिपिड मेटाबोलिज्म को कम करना, हाइपोकोलेस्टेरोलेमिक, मोटापा कम करना कम किया जा सकता है। ड्रेन डेम्प एवं डाययूरेटिक, एंटी इम्फ्लेमेंशन, पाचन, स्टीमुलेंट इन्टेस्टाइनल पेरिस्टेलसिस, कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ावा, प्रोमोट सेक्रेशन, बच्चों की वृद्धि को बढ़ाना सहित विभिन्न रोगों के उपचार में कारगर है। प्रशिक्षण में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी संदीप वैष्णव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी डोमेश्वर साहू, बीटीएम. सुरेन्द्र मधुकर, हरीश देवहरी, एटीएम विजय यादव, नवीन साहू की प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी रही।

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