नगर में लाखों रुपए की लागत से बनाए गौठान में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
त्वरित खबरे-गौठान समिति को व्यवस्था बनाने कई बार कहा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। माधव आदिवासी ने बताया कि गौठान में मवेशियों को रखने के लिए तार घेरा की जगह पेड़ की टहनियों को बांधा गया है।

नगर में लाखों रुपए की लागत से बनाए गौठान में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।गई थी। गोबर खरीदी व गौठान संचालन करने वाले समूह को वर्मी खाद बनाने के बाद उसकी रखरखाव व देखरेख को लेकर चिंता सताने लगी है। क्योंकि खाद को रखने समुचित व्यवस्था नहीं है। इसको लेकर समूह की महिलाएं परेशान है।

गौठान समिति को व्यवस्था बनाने कई बार कहा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। माधव आदिवासी ने बताया कि गौठान में मवेशियों को रखने के लिए तार घेरा की जगह पेड़ की टहनियों को बांधा गया है। इसी से गौठान की सुरक्षा की जा रही है। ग्रामीण महेंद्र वाजपेयी ने बताया कि गौठान समिति मनमानी कर रही है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीणों ने जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

। मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। गौठान उबड़ खाबड़ है। जिसे समतल नहीं कराया गया है। इससे मवेशियों को रखने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।


समूह की महिलाओं ने घरों से लकड़ी व बांस बल्ली लाकर सुरक्षा घेरा बनाया है। जबकि गौठान निर्माण के लिए पर्याप्त राशि स्वीकृत की गई थी। गोबर खरीदी व गौठान संचालन करने वाले समूह को वर्मी खाद बनाने के बाद उसकी रखरखाव व देखरेख को लेकर चिंता सताने लगी है। क्योंकि खाद को रखने समुचित व्यवस्था नहीं है। इसको लेकर समूह की महिलाएं परेशान है।

गौठान समिति को व्यवस्था बनाने कई बार कहा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। माधव आदिवासी ने बताया कि गौठान में मवेशियों को रखने के लिए तार घेरा की जगह पेड़ की टहनियों को बांधा गया है। इसी से गौठान की सुरक्षा की जा रही है। ग्रामीण महेंद्र वाजपेयी ने बताया कि गौठान समिति मनमानी कर रही है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीणों ने जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

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