नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, कार्रवाई नहीं होने से शातिर ठगों के हौसले बुलंद, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
त्वरित ख़बरें राहुल ओझा राजनांदगाव ब्यूरों प्रमुख

डोंगरगढ़। क्षेत्र में इन दिनों सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ठगों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, डोंगरगढ़ व आसपास के क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर संगठित तरीके से ठगी की जा रही है। इस मामले में आरोपी देवेंद्र गोरले को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, लेकिन कथित मास्टरमाइंड भिलाई का भाजपा नेता जयप्रकाश यादव अब तक फरार है। इसी कड़ी में कई और पीड़ितों ने भी सामने आकर शिकायत दर्ज कराई है। ग्राम रीवागहन निवासी जगत राम वर्मा ने आरोप लगाया है कि गांव के ही टकेश्वर वर्मा और डोंगरगढ़ निवासी आकाश शर्मा ने उनके पुत्र को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर वर्ष 2021 में किस्तों में 5 लाख 40 हजार रुपये लिए। यह लेन-देन परिचित अशोक बसोने की मौजूदगी में हुआ था। वहीं ग्राम विष्णुपुर निवासी भोजराम वर्मा ने टकेश्वर वर्मा और जयप्रकाश यादव पर आरक्षक पद पर भर्ती कराने के नाम पर 4 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। इसी प्रकार ग्राम रीवागहन के नंदकुमार वर्मा ने वेयरहाउस छुरिया में चपरासी की नौकरी दिलाने के नाम पर 1 लाख रुपये और खिलेश वर्मा ने अपनी पत्नी को आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज कराई है।

माहभर पहले शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य- पीड़ितों ने बताया कि रीवागहन निवासी टकेश्वर वर्मा के खिलाफ डोंगरगढ़ थाने में करीब एक माह पूर्व लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने जांच का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब तक न जांच आगे बढ़ी है और न ही किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

आरोप है कि जब फरियादी थाना पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर डराया जाता है कि नौकरी के नाम पर पैसा देने वाले भी आरोपी बनाए जा सकते हैं। इस डर के कारण पीड़ित ग्रामीण न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं।

कर्ज लेकर या धान बेचकर दी रकम, अब मिल रही धमकियां- पीड़ितों का कहना है कि किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने धान बेचकर रकम जुटाई थी। अब जब वे अपने पैसे वापस मांगते हैं, तो आरोपियों द्वारा गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी जाती है, जिससे उनका परिवार मानसिक तनाव में है। पीड़ितों ने लेन-देन से संबंधित एक वीडियो क्लिप भी पुलिस को सौंपी है, जिसमें नगद राशि दिए जाने का दृश्य कैद बताया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। पीड़ितों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष व गहन जांच कर इस ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इस तरह के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है और आम जनता का विश्वास व्यवस्था से उठ सकता है।

डोंगरगढ़ एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने कहा कि फिलहाल मैं अवकाश पर हूं। ड्यूटी में आनें के बाद संबंधित मामलों की जानकारी लेता हूं। थानें में पहुंचनें वालें हर फरियादियों की समस्या का निराकरण अवश्य करना है।

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