मंडीदीप 8 अप्रैल रायसेन जिले के गुदावल में स्थित मां कंकाली के मंदिर पर सप्तमी, अष्टमी और नवमी को भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि अष्टमी और नवमी के रात्रि कालीन हवन पूजन में पूर्णाहुति के बाद मां कंकाली की गर्दन कुछ पलों के लिए सीधी हो जाती है। यही कारण है कि आज से ही अधिक संख्या में भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं।
साल भर जाने वाले भक्त यह जानते है कि मां कंकाली देवी मंदिर में प्रतिमा की गर्दन टेढ़ी है। ऐसा माना जाता है कि साल में नवरात्र की अष्टमी नवमी के दिन मां की टेढ़ी गर्दन कुछ समय के लिए सीधी हो जाती है। मां का यही चमत्कार देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
गुदावल कंकाली मंदिर समिति के सह सचिव बदामी सिंह मीणा बताते हैं कि नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को पूर्णाहुति के बाद कुछ पलों के लिए मैया की गर्दन सीधी हो जाती है। इस नवरात्रि में शनिवार और रविवार को यह तिथियां हैं। ऐसे में माता के दर्शनों के लिए आमदिनों की अपेक्षा यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। आने वाले भक्तों के लिए स्थानीय समिति और पहले से तैयारी करते हैं।
संतान प्राप्ति की मनोकामना लिए आते हैं भक्त
मां कंकाली के मंदिर में इन दिनों संतान प्राप्ति की मनोकामना को लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। संतान प्राप्ति के लिए मंदिर पर श्रद्धालु गोबर से उल्टे हाथ के निशान लगाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर हाथों के सीधे निशान बना दिए जाते हैं। यह मानता है कि श्रद्धा भक्ति से जो भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं उनके यहां निश्चित ही संतान प्राप्त होती है।

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